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"रफूचक्कर"/हास्य -व्यंग्य कविता -अर्पणा शर्मा

देख पुलिस का पहरा सड़क पर,
गाज गिरी बिन हेलमेट के,
दोपहिया चालक पर,
हड़बड़ाया ,वो घबराया,
जब पुलिस ने उसे,
टिकट चालान का पकड़ाया,
बटुए का उसे खयाल आया,
अभी देता हूँ,
कहते-कहते वो घनचक्कर,
जल्दी से गाड़ी चला,
हुआ रफूचक्कर,
पुलिस ने नया दाँव अजमाया,
आरटीओ से घर का,
पता निकलवाया,
चालान टिकट उसके ,
घर भिजवाया,
अब ऊँट पहाड़ के नीचे आया,
फिजूल ही खुद को चूना लगाया,
जोश हुए ठंड़े, चालान भरकर,
सारी बदमाशी हुई रफूचक्कर,
दोपहिया चलाते अब,
हमेशा हेलमेट पहनकर...!

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Arpana Sharma on November 4, 2016 at 7:28pm
आदरणीय समर कबीर जी-हौसला अफजाई के लिये बहुत शुक्रिया,आभार
Comment by Samar kabeer on November 4, 2016 at 5:13pm
मोहतरमा अर्पणा शर्मा जी आदाब,बढ़िया रचना हुई,बधाई स्वीकार करें।

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