For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जय-जय हिन्दुस्तान (दोहा गीत 'राज ')

दोहा गीत

आज़ादी की राह में ,शत शत वो बलिदान|

याद कहो कितना रहा ,बोलो हिन्दुस्तान||

 

सावरकर की यातना,देखी थी प्रत्यक्ष|

अंडमान की जेल में,काँपे पीपल वृक्ष||

संग्रामी आक्रोश में ,कितने बुझे चिराग|

कितनी टूटी चूड़ियाँ,कितने मिटे सुहाग||

 

कितनी दी कुर्बानियाँ,तब पाया सम्मान|

याद कहो कितना रहा ,बोलो हिन्दुस्तान||

 

रहे सदा जाँ बाज वो,हर सुख से महरूम|

झूल गये जो जान पर,उन फंदों को चूम||

नेहरू गाँधी शास्त्री,औ गंगा धर बाल|

कूद पड़े सब जंग में ,भारत माँ के लाल||

 

सींच लहू से क्यारियाँ,सफल किया अभियान|

याद कहो कितना रहा ,बोलो हिन्दुस्तान||

 

एक विटप की छाँव में,बैठे धर्म अनेक|

अलग अलग मोती मगर,बँधे सूत्र में एक||

चाहे पुष्प अनेक हम ,एक मगर उद्द्यान|

करें नमन इस देश को, जय जय हिन्दुस्तान||

 

सरहद के जाँ बाज तू ,इकला खुद मत मान|

तेरे पीछे है खड़ा,सारा हिन्दुस्तान||

जय जय हिन्दुस्तान

जय जय हिन्दुस्तान

        -------मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 770

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on October 12, 2016 at 9:01pm
लेकिन में फिक्रमंद हो जाता हूँ बहना, मुझे ऐसा लगता है कि आपको मेरी ज़रूरत है, आप मुझे पुकार रही हैं,और में चाह कर भी नहीं आ पाता हूँ,आख़िर बहन कहा है आपको ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2016 at 8:06pm

आद० रवि शुक्ल भैय्या, आपको ये दोहा गीत पसंद आया आपका बहुत- बहुत आभार| 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2016 at 8:04pm

आ० समर भाई  जी  कोई  बात  नहीं मैं  समझ गई थी बस प्रणाम करना था कोई ख़ास बात नहीं थी |

Comment by Ravi Shukla on October 12, 2016 at 3:39pm

आदरणीया राजेश दीदी सुन्‍दर दोहा गीत हुआ है बधाई स्‍वीकार करें । 

Comment by Samar kabeer on October 10, 2016 at 8:28pm
बहना हमेशा ख़ुश रहो, आपका मेसेज मिला लेकिन जवाब इसलिए नहीं दे पाया कि मेरे बेटे को ओबीओ पर चेट करना नहीं आता,में इसके लिये क्षमा प्रार्थी हूँ ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2016 at 5:58pm

आद० समर भाई जी ,इस गीत को आपका आशीष मिल गया बस लिखना सफल हुआ दिल की असीम गहराई से आपका आभार नमन .

Comment by Samar kabeer on October 10, 2016 at 5:40pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,बहुत उम्दा दोहा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2016 at 5:29pm

आद० अर्पणा  जी आपको ये दोहा गीत पसंद आया मेरा लिखना सार्थक हो गया दिल से बहुत बहुत आभार |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 10, 2016 at 5:28pm

आद० सुरेश कुमार जी ,दोहा गीत पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया की बहुत आभारी हूँ |

Comment by Arpana Sharma on October 10, 2016 at 4:17pm
"सारे जग में प्रकाशमान,
जय-जय हिन्दुस्तान "
बहुत सुंदर देशभक्ति की कविता । बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया राजेश कुमारी जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service