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गजल-मुफलिसी बेबाक हो गई

गजल

 

मुफलिसी बेबाक हो गई।
भूख ही खुराक हो गई।।

 

जिसने किया खुदी को बुलंद
जहाँ में उसकी धाक हो गई।।

 

जो पल में छीन लेते थे जिंदगी।
वो हस्तियां भीं खाक हो गई।।

 

किसी को गरज नहीं यहां जहाँ की।
सबको अपनी प्यारी नाक हो गई।।

 

जिसने इंकलाब का बिगुल बजाया।
उसकी बात "चंदन" मजाक हो गई।।

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 15, 2011 at 9:35pm

जो पल में छीन लेते थे जिंदगी।

वो हस्तियां भीं खाक हो गई।।

बहुत खूब पुनिया साहिब, ऊपर वाले के आगे किसी की सल्तनत नहीं चलती , पाप का घड़ा एक न एक दिन अवश्य भरता है, और अंजाम सबके सामने है | सुंदर ख्यालात , बहुत बहुत बधाई इस खुबसूरत ग़ज़ल हेतु |

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