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दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लिजिए
दूर रहने की अब ना सजा दिजिए

मेरे नयनो की आप रोशनी हो बनी
आप बिन कुछ ना देखूँ है खुद से ठनी
ज्योति को यूँ ना दृग से जुदा किजिए
दिल पे दस्तक .......

मद में ही मै भटकता रहा दर-बदर
रास आई तन्हाई मुझे इस कदर
इस तन्हाई को अपना पता दिजिए
दिल पे दस्तक .......

दिल में दर्दे हिज्र की अब तामीर हो रही
ख्वाब में आपके मेरा जिक्र भी नही
दश्ते-बेकसी से अब तो फना किजिए
दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लिजिए

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 24, 2016 at 9:51pm

 प्रिय पवन , सुन्दर भाव हैं  पर शिल्प में कसाव नहीं है . मैं  कोशिश करता हूँ -

दिल पे दस्तक जो दूँ तो बुला लीजिये
दूर रहने की अब मत  सजा  दीजिये

मेरे नयनो की हैं  आप ही रोशनी 
जो न देखूं  तो मानो स्वयं से ठनी
नेह को यूँ ना दृग से जुदा कीजिये
 

अपने मद में भटकता रहा दर-बदर
रास  तनहाई आई  मुझे इस कदर
 दिल लगा पूंछने अब  पता दीजिये
 

दर्द यह हिज्र का है यकीनन सही
ख्वाब में आपके जिक्र मेरा नहीं
मेरी हर र्बेकसी को  फना कीजिये 

Comment by बशर भारतीय on May 24, 2016 at 2:44pm
अच्छा गीत है बधाई
Comment by pratibha pande on May 23, 2016 at 8:02pm

 सुन्दर गीत ,सुन्दर प्रवाह ,बधाई प्रेषित है आपको आदरणीय पवन जी 

Comment by kanta roy on May 23, 2016 at 4:35pm
वाह ! लाजवाब गीत बनी है । बधाई प्रेषित है आदरणीय पवन जी
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 20, 2016 at 10:17pm

मद में ही मै भटकता रहा दर-बदर
रास आई तन्हाई मुझे इस कदर
इस तन्हाई को अपना पता दिजिए
दिल पे दस्तक ....... बहुत खूब आदरणीय | हार्दिक बधाई | 

Comment by Samar kabeer on May 19, 2016 at 6:44pm
जनाब पवन कुमार जी आदाब,अगर ये कविता है तो ठीक है, लेकिन ये नज़्म है तो बहुत से मिसरे लय में नहीं हैं,बहरहाल इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Shyam Narain Verma on May 19, 2016 at 5:36pm
इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on May 19, 2016 at 5:20pm
क्या बात है आदरणीय पवन कुमार जी अति उत्तम रचना सचमुच ही दिल पे दस्तक दे गई बधाई हो

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