For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कैक्टस का फ़ूल –( लघुकथा ) –

कैक्टस का फ़ूल –( लघुकथा ) –

कालेज की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में सुबोध इस बार अपने मित्र आनंद का आग्रह टाल ना सका और उसके गॉव आगया!काफ़ी बडा गॉव था!कहने को गॉव था पर शहरी हर सुविधा मौज़ूद थी!रेलवे स्टेशन,बस स्टॉप,अस्पताल,बैंक ,बिजली,पानी,टी वी,इंटरनैट आदि सब उपलब्ध था!

बैठक में सुबोध अकेला बैठा था कि एक सज्जन मिलने आगये!बडा अजीब प्रश्न किया,"क्या तुम भी माया को देखने आये हो"!

सुबोध कुछ कहता उससे पहले ही आनंद आगया और वह सज्जन खिसक लिये!सुबोध को कुछ समझ नहीं आया अतः आनंद से पूछ बैठा!

आनंद ने    बताया,"यार माया मेरी बहिन है,वह बत्तीस की  होने वाली है!डबल एम ए और बी एड है!उसका रिश्ता तय नहीं हो पा रहा क्योंकि वह ज़ुबान की थोडी कडवी है"!

"क्या मैं एक बार माया जी से मिल सकता हूं"!

 शाम को सुबोध को बैठक में चाय देने माया ही आई!

"माया जी क्या मैं आपसे बात कर सकता हूं"!

"तुम शहरी लोगों की यही आदत खराब है कि अकेली लडकी देखी और लार टपकनी शुरू"!

"आप मुझे गलत समझ रही हैं"!

"आप मेरे भाई के मित्र हो वरना अब तक दो चार पड गये होते"!

सुबोध ने आनंद को अपना निर्णय सुनाया कि वह माया से शादी के लिये राज़ी है!

"सुबोध, माया के बारे में सब कुछ जानने के बाद भी ,कहीं तुम मेरी मित्रता के दवाब में तो नहीं कर रहे शादी"!

"नहीं मित्र, ऐसा बिलकुल भी नहीं है!दर असल मुझे अपने ड्राइंगरूम में कैक्टस का फ़ूल सज़ाना पसंद है"!

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 478

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on March 20, 2016 at 2:32pm

हार्दिक आभार आदरणीय चंद्रेश जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on March 20, 2016 at 2:31pm

हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी!

Comment by TEJ VEER SINGH on March 20, 2016 at 2:30pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी!

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on March 20, 2016 at 11:35am

सुंदर सकारात्मक सोच पैदा करने वाली रचना कही है आदरणीय सर| बहुत  बधाई इस रचना के सृजन  हेतु|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 20, 2016 at 10:42am

वाह वाह...  ड्राइंग रूम में कैक्टस का फूल पसंद है.. ताकि लोग दूर  से  सराहें  तो पर तोड़ने की हिम्मत  कभी न कर सकें बहुत शानदार लघु कथा दिल से बधाई आ० तेजवीर सिंह जी |

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 19, 2016 at 12:49pm
हर माया कैक्टस का फूल ही तो है गांव में हो या शहर में...हर किसी को चाहिए यह माया....इसके..बोध...सुबोध...और आनंद...और ...आघात.. को समझने की ज़रूरत है। बहुत बढ़िया कथानक है। मैं क्या इसे सही तरीके से समझ पाया आदरणीय तेज वीर सिंह जी? हार्दिक बधाई आपको सुंदर अनुपम कृति के लिए।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
48 minutes ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
3 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
4 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
4 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
4 hours ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
5 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
5 hours ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
5 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
5 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service