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बरसात के पानी ने -ग़ज़ल (लक्ष्मण धामी मुसाफिर' )

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हर हद को ही  तोड़ा है  बरसात के पानी ने
किस बात  को माना  है बरसात के पानी ने /1

उस वक्त तो सूखा था जीवन क्या हरा होता
अब  गाँव  डुबाया  है  बरसात  के पानी ने /2

ये  जश्न  की  बेला  है  सूखे  की  विदाई की
नदिया को भी  न्योता है बरसात के पानी ने /3

मत खेत की  बोलो तुम भाग्य ही ऐसा  था
घर  द्वार भी  रौंदा है  बरसात  के पानी ने /4

कल रात सुना है  फिर सूखे की शिकायत पर
किस किस को न तोड़ा है बरसात के पानी ने /5

पहले से ही क्या कम था भीगा हुआ दामन जो
अब  और  भिगाया  है  बरसात  के  पानी ने /6

दुखती  हुई  आँखों से  मिलने पे कहा इतना
‘मुझसे भी  तो नाता है’ बरसात  के पानी ने /7

मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:27am


आ0 भाई गोपाल नारायन जी हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:27am


आ0 भाई सलीम रजा जी प्रशंसा के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:26am


आ0 भाई गिरिराज जी उपस्थिति से गजल का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद । आपकी और भाई मिथिलेश जी की बात से मैं भी पूर्णतः सहमत हूँ ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:26am


आ0 भाई तेजवीर जी स्नेह के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:26am


आ0 भाई मिथिलेश जी प्रशंसा और उससे बढकर बेहतरीन सलाह के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:26am


आ0 भाई श्याम नरायन जी, प्रशंसा के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 17, 2016 at 11:25am

आ0 भाई समर कबीर जी उपस्स्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद । त्रुटि की ओर ध्यान दिलाने के लिए आभार ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 23, 2016 at 7:00pm

वा वाह क्या बात है , सुन्दर . 

Comment by SALIM RAZA REWA on January 22, 2016 at 7:52pm
खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2016 at 9:48pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , अच्छी गज़ल कही है हार्दिक बधाइयाँ आपको । बहर के मामले मे मै भी आ. मिथिलेश भाई जी से सहमत हूँ ।

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