For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बहर- 2122/1212 /22
(मन में जोभी मलाल रखते हैं)
जिंदगी जो मलाल रखते है
वो नही जो खयाल रखते है

वास्ता हि नही रहा उनका
बस खयाली पुआल रखते हैं

मौत से वो रहा डरा ही है
जो भि डर मन में पाल रखते हैं

हार जो भी गया हंसी पल है
बाद चाले सभाल रखते है

इश्क में ठोकरें लगी जिनको
प्यार वो बेमिसाल रखते है

धर्म समझा कभी नही वो है
मजहबी जो दीवाल रखते हैं

बात प्यारी हसीन होठों पर
प्यार में वो मिसाल रखते हैं
----------------------------------------------
मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिंदौरी

Views: 793

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ravi Shukla on September 16, 2015 at 2:47pm

आदरणीय आमोद जी गज़ल के लिये बधाई स्‍वीकार करें । एक बात तो हमे समझ आई वो ये कि आप शब्‍द को उसके मूल रूप में ही लिखे पढ़ते समय स्‍वयं ही मात्रा गिरा कर पढ़ा जा सकता है ।

मौत से वो रहा डरा ही है
जो भि डर मन में पाल रखते हैं ...... इसमें भि को सही रूप में लिखना होगा

वास्ता हि नही रहा उनका
बस खयाली पुआल रखते हैं  ..... इसमे हि की टंकण त्रुटि है शायद । और हमने ख्‍याली पुलाव पढ़ा है पुआल शायद आपने काफिया मिलाने के लिये ले लिया है देख लें एक बार ।

धर्म समझा कभी नही वो है
मजहबी जो दीवाल रखते हैं .... इस शेर में दीवाल आम बोल चाल का शब्‍द है जबकि दीवार और उसकी सुविधा अनुसार दिवार का उपयोग ग़ज़लों में हो रहा यहां कितना उपयुक्‍त है और उस्‍ताद इस बारे मे कहेंगे तो हमारा भी संशय दूर हो सकेगा

दूसरे और तीसरे शेर में तकाबुले रदीफ है इसे भी दूर करने से ग़ज़ल की खुबसूरती बढ़ेगी आमोद जी ।

इसके आगे की बात बाकी जो

वो अदीबो पे टाल रखते है

सादर ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 16, 2015 at 2:42pm
जी आ मुकेश जी
सादर आभार
Comment by MUKESH SRIVASTAVA on September 16, 2015 at 12:23pm

Sahee kahaa achhaa kaha mitra

Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 16, 2015 at 10:55am
सादर प्रणाम
गुणीजन से निवेदन अनुरोध है
के एक बार मेरी यह गजल चेक करी जाएं
और त्रुटियाँ बताई जाये

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service