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लुटा हाला गया मुझ पर...गजल

बहर
1222/1222/1222/1222

अचानक आज ये कैसा ज़ुल्म पहरा गया मुझ पर।
सितम इतने कहा से वो लेकर ढा गया मुझ पर।।

न बारिश है न सावन है हवा का भी नही झोंका।
ये कैसे गम के बादल हैं कहा से छा गया मुझ पर।।

चलो अब चाँद तारों तुम मेरी हालत पे हँस भी लो।
तुम्हे अच्छा स मौका है अमावस आ गया मुझ पर।।

इजाजत दे गए अपने चिरागों घर जलाने की।
जला दो उनकी यादें जो चुभा भाला गया मुझ पर।।

लगे है जख्मकुछ ऐसे दुआ का भी असर न हो।
के वो तफसीसे मोहब्बत चला आरा गया मुझ पर।।

कभी दीपक जलाता था घरों में मैं मुहब्बत के।
उसी का रोष है मालिक लुटा हाला गया मुझ पर।।
मौलिक/अप्रकाशित

©आमोद बिन्दौरी

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Comment

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Comment by amod shrivastav (bindouri) on October 15, 2015 at 7:06pm
मयहब्बत की कलम लेकर सितम लिक्खा गया मुझ पर//
मेरे दिल से जो भी निकला कहर बारपा गया मुझ पर ।।।।
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 22, 2015 at 3:04pm
अचानक जुल्म येकैसा आज सह आ गया मुझ पर
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 22, 2015 at 3:04pm
अचानक जुल्म येकैसा आज सह आ गया मुझ पर
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 21, 2015 at 7:27pm
वैसे सर आप को क्षेत्रीय भाषा का विरोध नही करना चाहिए
अब हमारी भाषा ही गुरु भाई बन्धु दादा
जैसे सब्द बोलने की है
क्यों की हम ठेठ खड़ी बोली वाले गांव से है
इतना तो सहूर कर के बोलत हन
नही तो
का करत हा दादू
औउर सब ठीक ठाक हवे
जैसी है

सर आप बड़े है । आप सभी से कुछ न कुछ
सिखने का मुझे जो आशीर्वाद मिला है
वो गुरुजन के अलावा कही नही मिल सकता
आप सभी हमसे श्रेष्ठ है
तो गुरुजन सर भाई दादा आदरणीय में क्या बुराई है

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 21, 2015 at 3:23pm

आदरणीय आमोद भाई , आपसे प्रार्थना है , आप गुरु संबोधन मुझे न दिया करें , इस मंच मे सभी सीखते हैं एक दूसरे से , कोई गुरु नही न कोई चेला , बस अपनी जानकारी एक दूसरे को साझा करते हैं सब । अतःमै त्प पूरे मंच की तरफ से आपसे कह रहा हूँ , गुरु , गुरुवर जैसे सम्बोधन से सम्बोधित न किया करें । आशा है आप आगे खयाल रखेंगे इस सीख का । अब आपके शे र के विषय में ---

आप चाहें  तो शे र का उला यूँ कर सकते हैं  -- अगर भाव आपको भी सही लगे --

दुआ का भी असर होता नहीं यूँ ज़ख्म हैं मेरे   

Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 21, 2015 at 2:32pm
एक जानकारी दे कृपया
क्या मैं हाइकू रचनाएँ पोस्ट कर सकता हूँ
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 21, 2015 at 2:28pm
आ कृष्णा सर
आप का आशीर्वाद मिलाता रहे बस
हम बली चढ़ने को तैयार है:-)
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 21, 2015 at 2:25pm
आ गिरिराज सर
आप तो हमें मध्य में फंसा दिए
ना की जरूरत भी है
और ना लिख भी नही सकते
अब कहा जाये गुरुवर---:-)
Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 21, 2015 at 2:24pm
आ मिथलेश सर; आ मुकेश सर;आ गिरिराज सर

बहुत बहुत आभार नमन
Comment by MUKESH SRIVASTAVA on September 21, 2015 at 2:14pm

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