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दोहा गीत - रक्षा बंधन पर्व में,

दोहा गीत -

रक्षा बंधन पर्व में,

दुनिया भर का प्यार

 

ऐसा पावन पर्व यह, है भारत की शान

सम्बन्धों की डोर का, बढे खूब सम्मान |

राखी धागे में बँधी, रक्षा की पतवार

बहन लुटाती भ्रात पर, दुनिया भर का प्यार

 

राखी धागा प्रेम का, बहना देती मान,

आत्महीन भाई वही दे न सके सम्मान |

रिश्ते ही परिवार में, जीने का आधार

भाई के उपहार में, दुनिया भर का प्यार

 

रक्षा बंधन पर्व में, छुपी खूब यह प्रीत

सबसे ऊपर प्रेम है, जग माने यह रीत |

झलके इस त्यौहार में, प्रेम प्रीत व्यवहार

राखी के दो तार में, दुनिया भर का प्यार

 

बहना हो कर्णावती, मिले हुमायूँ भ्रात

मुँह बोली बहना मिले,जात रहे ना पात |

जात पात को भूलता, रिश्तों का संसार

इस पावन सम्बन्ध में,, दुनिया भर का प्यार

 

इस पावन त्यौहार में, सूना रहे न हाथ,

जब तक सूरज चाँद है, रहे प्रेम का साथ,

सदियों से इस देश में, मना रहे त्यौहार

ज्योतिर्मय इस दीप में, दुनिया भर का प्यार

(मौलिक अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 1, 2015 at 11:34am

सही  कहाँ आपने आदरणीया प्रभा पाण्डे  जी | दरअसल पहली बार मेरी एकलौती बहन न होने पर भावों को रोक नहीं पाया और पाहे दोहे रच उन्हें  गीत रचना में ढालकर पोस्ट किये | दोहे पर अंतिम दोहा बहन पर ही था -

आँखें मेरी नम हुई, बहना करूं प्रणाम,
बहना मेरी जा बसी,जहाँ ईश का धाम | -लक्ष्मण रामानुज 

गीत रचना सराहने के लिए आपका हार्दिक  आभार | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 1, 2015 at 11:29am

राखी जैसे पावन और पवित्र प्रेम के त्यौहार का महत्त्व बताते हुए रचित दोहा गीत सराहने के लिए आपका  ह्रदय से हार्दिक  आभार आदरणीय  श्री  सौरभ पाण्डेय  जी | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 1, 2015 at 11:12am

हार्दिक  आभार  आदरणीया शशी बंसल जी 

Comment by pratibha pande on September 1, 2015 at 10:01am
राखी का त्यौहार सचमुच निराला होता है , किसी और संस्कृति में शायद ही ऐसा कोई त्यौहार हो ,आपको हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी इस रचना के लिए

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 31, 2015 at 10:54pm

आदरणीय लक्ष्मण प्रसादजी, आपने दिल से इस दोहा-गीत की रचना की है. राखी केअवसर पर इस तरह की अभिव्यक्ति कई मायनों में महती हुआ करती है. 

हार्दिक शुभकामनाएँ 

Comment by shashi bansal goyal on August 31, 2015 at 7:15pm
अति सुन्दर प्रस्तुति ।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 31, 2015 at 4:26pm

रक्षा बंधन पर्व पर रचित  गीत  रचना  सराहने के लिए हार्दिक आभार आपका श्री मिथिलेश वामनकर जी | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 31, 2015 at 2:30pm

आदरणीय  लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर बहुत सुन्दर दोहा गीत हुआ है. इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें। सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 30, 2015 at 11:08am

रक्षा बंधन पर्व पर रचित गीत  रचना सराहने के लिए बहुत बहुत आभार आपका श्री समर कबीर भाई | आपको भी इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Samar kabeer on August 29, 2015 at 11:34pm
जनाब लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी,आदाब,रक्षाबंधन के पर्व पर इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।

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