For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक ग़ज़ल -- सुलभ अग्निहोत्री

बहर - 2212 1212   22 1212

वो भ्रम तुम्हारे प्यार सा बेहद हसीन था
सपनों के आसमान की मानो जमीन था

सारी थकान खींच ली गोदी में लेटकर
बच्चा वो गीत रूह का ताजातरीन था

हर खत में अपनी खैरियत, उसको दुआ लिखी
माँ यह कभी न लिख सकी, कुछ भी सही न था

मन, प्राण, आँख द्वार पर, बेकल बिछे रहे
कुनबा तमाम जुड़ गया, आया वही न था

अँजुरी मेरी बँधी रही और सारा रिस गया
वो प्यार रेत से कहीं ज्यादा महीन था

सूरज बगैर हर दिशा को रौदता रहा
जो शख्स धुंध बन गया, बेहद जहीन था

मैं फलसफों के व्यूह में, बस फँस के रह गया
वो सिलसिला शुरू हुआ तो अन्तहीन था

मैंने किसी के घाव पे मरहम लगा दिया
तुम क्यों बिखर गए तुम्हें मुझ पर यकीन था

----- सुलभ अग्निहोत्री

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1179

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sulabh Agnihotri on August 9, 2015 at 11:01am

Samar kabeer जी ! एक मिसरा भी बहर से खारिज नहीं है। कृनया बहर देख लें। जहाँ तक सवाल काफिये का है - तो मेरा निश्चित मत है कि तुक या काफिया भी उच्चारणा और ध्वनि का विषय है, न कि शब्द और उसके अर्थ का। उसी तरह जैसे मात्रा-गणना (तक्तीय) उच्चारण का विषय है, मिसराा लिखा कैसे जाएगा यह नहीं देखा जाता। इस दृष्टिकोण से ‘सही न’ और ‘वही न’ में मुझे कोई दोष नहीं दिखाई देता।
गजल की क्लास मैं पढ़ चुका हूँ, जितनी आत्मसात करने लायक थी कर चुका हूँ।
एक विनम्र सलाह - देवनागरी में उठाऐं गलत है, इसे उठायें या ‘उठाएँ’ लिखा जाएगा। कृपया सुधार लें। -- सादर !

Comment by Sulabh Agnihotri on August 9, 2015 at 10:49am

मिथिलेश वामनकर जी मेरी बहर तो वही है जो मैंने लिखी है,हाँ पढ़ उसे आप उस बहर में भी सकते हैं जो आपने बताई है - बस चैथे शेर में पर की जगह पे करना पड़ेगा।
देखिये जान गोरखपुरी जी ने सही पकड़ी थी।

Comment by Samar kabeer on August 8, 2015 at 11:37pm
जनाब सुलभ अग्निहोत्री जी,आदाब,ग़ज़ल की कोशिश अच्छी है लेकिन कहीं कहीं मिसरे बह्र से ख़ारिज हैं और कुछ शैरों में क़ाफ़िये भी सही नहीं है ,"ज़हीन" और "हसीन" क़ाफ़िये के साथ "वही न" क़ाफ़िया ,ये क्या है ? देख लीजियेगा,कृपया ओबीओ पर ग़ज़ल की कक्षा का लाभ उठाऐं ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 8, 2015 at 12:54pm
आपकी ग़ज़ल इस बह्र में है भाई जी
221 2121 1221 212
Comment by Sulabh Agnihotri on August 8, 2015 at 12:30pm

बहुत-बहुत आभार Harash Mahajan जी ! 

Comment by Sulabh Agnihotri on August 8, 2015 at 12:29pm

बहुत-बहुत आभार जान गोरखपुरी जी ! जी, आपका अन्दाजा सही है बहर के संबंध में।

Comment by Sulabh Agnihotri on August 8, 2015 at 12:28pm

आपके निर्देश का पालन कर दिया है मिथिलेश वामनकर जी !

Comment by Harash Mahajan on August 6, 2015 at 8:07pm


आ० सुलभी जी अति सुंदर पेशकश सभी शेर उत्तम ...दाद हाज़िर ..!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on August 6, 2015 at 7:40pm

लाजव़ाब! लाजव़ाब! क्या कहने जिंदाबाद गज़ल हुयी है दाद ही दाद पेश है ! आ० सुलभ जी आ० मिथलेश सर की बात पर अवश्य गौर फरमाएं! मंच पर मेरे जैसे गज़ल सीखने वाले बहुत से नवाभ्यासी है..बह्र लिखने से हमारे लिए आसानी हो जाती है! जहाँ तक मै समझ पा रहा हूँ  गज़ल की बह्र  २२१२ १२१२ २२१२ १२ है!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 6, 2015 at 4:21pm

आपसे विशेष निवेदन है कृपया बह्र / वज्न लिखने की कृपा करें..... ये मंच की परंपरा रही है जो अब अनुशासन की श्रेणी में माना जाता है. सादर निवेदन पुनः पुनः 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
4 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service