For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दोहा गीत (एक प्रयास)

मनुज रूप मैं पा गया,

हुआ स्वप्न साकार

 

 

कोमल किरणे भोर की,

बिखराती जब नेह है,

दिखती उल्लासित धरा

आन्दंदित हर देह है.

 

सचमुच एक सराय सा

लगा मुझे संसार

 

प्यार भरे व्यवहार से

मिलती देखी जीत है,

बना एक अनजान जब,

मेरे मन का मीत है

 

सच्ची निष्ठा ने किया,

हरदम बेडा पार

 

लोभ मोह माया कपट,

सारे लगते काल हैं,

सत्य यहाँ है मौत ही,

बाकी सब जंजाल हैं.

 

परम पिता का शुक्रिया

और नमन हरबार.

 

 

मौलिक/अप्रकाशित.

 

Views: 778

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 20, 2015 at 11:59pm

अभ्यास के तौर पर अच्छा रचनाकर्म हुआ है आदरणीय अशोकजी.
वैसे कई जगह विशेष तौर पर ध्यान देने की आवश्यकता है लेकिन चूँकि आपने पहली बार इस तरह की विधा पर काम किया है उस हिसाब से आपका प्रयास श्लाघनीय है. हार्दिक शुभकामनाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 11, 2015 at 12:34pm

क्या बात है , ये विधा तो बहुत अच्छी लगी , आदरणीय , दोहा गीत , लाजवाब ॥ आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 10, 2015 at 8:53pm

दोहा-गीत  अद्भुत प्रयास ' की आवश्यकता कहाँ है और इस 'है' से दोहे  भी  मात्रा  से भटक गये . सारा गीत दोहे में ढल सकता था आदरणीय तथापि नए प्रयोग हेतु आपको बधायी .

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on July 10, 2015 at 11:32am

बधाई  मित्र - सुन्दर रचना के लिए 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 9, 2015 at 8:07pm

आदरणीय सुशील सरना जी सादर, दोहा गीत  पर  मेरा प्रथम  ही  प्रयास  है. आपको  यह  अच्छा  लगा  मैं  आश्वस्त  हुआ. बहुत-बहुत  आभार. सादर. 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 9, 2015 at 8:05pm

आदरणीय  मिथिलेश  वामनकर  जी  सादर, आपको  मेरा यह  प्रयास  अच्छा  लगा, मुझे  संतोष मिला. हार्दिक  आभार. सादर. 

Comment by Sushil Sarna on July 9, 2015 at 8:01pm

लोभ मोह माया कपट,
सारे लगते काल हैं,
सत्य यहाँ है मौत ही,
बाकी सब जंजाल हैं.

परम पिता का शुक्रिया
और नमन हरबार.
.... .... वाह आदरणीय बहुत ही सुंदर,सार्थक दोहा गीत बन पड़ा है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 9, 2015 at 7:04pm
आदरणीय अशोक रक्ताले सर
बहुत सुन्दर गीत हुआ है। इस दोहा गीत की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 9, 2015 at 6:29pm

आदरणीय राहुल दांगी जी  आपको दोहा गीत पर  मेरा प्रयास पसंद आया मुझे संबल मिला. सादर आभार.  

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 9, 2015 at 6:29pm

आदरेया राजेश कुमारी जी सादर, बिलकुल सहमत हूँ मैं. मुझे मंच  ने जो दो उदाहरण उपलब्ध कराये हैं, उनके एक गीत में कुछ इसीतरह से रचना की गई है और एक  जिस तरह आप कह रहीं हैं. जिसमे अंतरा लगभग एक दोहा ही हो जाता है. मैंने एक गीत उस तरह भी रचा है. शीघ्र ही वह भी प्रस्तुत करूँगा. गीत पसंद करने के लिए आपका बहुत-बहुत  आभार. सादर. 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
5 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
7 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
16 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
yesterday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service