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योग भगाये तन के सब रोग,

मन में सच्चा विस्वास जगाए।   

जो नित करे जीवन में योग,

भव बाधा जीवन से मिट जाएँ ॥  

मन मस्तिष्क का सुंदर संयोग

चुस्त और तंदुरुस्त शरीर बनाए ।

आलस्य भगाए जीवन से योग

समाज में प्रेम दया बंधुत्व जगाए ।

छल कपट लालच का नहीं संयोग

सबके जीवन से दुख दूर भगाए ॥

जीवन का है यह अनुपम संयोग 

जाति धर्म की दूरियों को मिटाए ।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाते लोग

जग को एक छत्र के नीचे लाए ।

अपने जीवन में अपना कर योग 

सब उन्नतिशील समाज बनाए ।

कुछ मुसलमानों का देखो हठ योग

मजहब से जोड़ इसे तकरार बढ़ाए ।

योग पर राजनीति करते कुछ लोग

भारत की देन पर अपना नाम चमकाएँ ।

आज छा रहा जगत में अब यह योग

चारों दिशाओं में अपना परचम लहराए ।

यह सुंदर स्वस्थ परंपरा का योग

जहाँ ऊंच नीच सब संग मिल जाएँ ॥

मौलिक एवं अप्रकाशित

राम आश्रय 

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Comment

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Comment by MUKESH SRIVASTAVA on June 24, 2015 at 12:48pm

sundar aur samayuik rachnaa - badhaee

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 22, 2015 at 11:41am

आ० राम आसरे जी

आपने योग की महिमा बतायी . आपका आभार .

कृपया ध्यान दे...

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