For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रमल मुरब्बा सालिम  

2122   2122

क्या  ज़माने आ गये हैं ?

बेशरम  शर्मा  गये  हैं  I

 

था  भरोसा बहुत उनका

वे मगर उकता गये हैं I

 

पोंछ लें आंसू कृषक अब 

स्वर्ण वे  बरसा गये हैं I

 

देखकर   अंदाज   तेरे

हौसले  मुरझा  गये है I

 

लाजिम है हो नशा भी

जाम जब टकरा गये हैं I

 

भौंकते थे जो कभी वह

महफ़िलों में छा गये है I

 

एक झटका था जरा सा

देश तक भहरा गये हैं I   

  

मर रह ही है देव नदियाँ

सिन्धु सब घबरा गये है I

(मौलिक व् अप्रकाशित )

 

 

Views: 847

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on June 10, 2015 at 11:32am

बहुत उम्दा प्रयास आ. डॉ साहब.. 
बे-शर्म ..सही होगा ..२२१ बाक़ी आ. गिरिराज जी कह ही चुके हैं..
वीनस जी से सहमत हूँ..
इस  प्रयास के लिए बधाई 

Comment by वीनस केसरी on June 10, 2015 at 1:21am

आदरणीय, सुन्दर ग़ज़ल के लिए बधाई

पोंछ लें आं/ सू कृषक अब

पोंछ २१  लें  २ आं २ / सू २ कृषक १२  अब २ = २१२२ / २१२२
इस मिसरे में मुझे कोई दिक्कत नहीं दिख रही है


Comment by Samar kabeer on June 9, 2015 at 11:50pm
आली जनाब गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,आदाब,आपकी ग़ज़ल बहुत पसंद आई,दिल से दाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

मतले में शब्द "बेशरम" एक तरह से सही है लेकिन सही शब्द "बेशर्म " है,बाक़ी इस्लाह जनाब गिरिराज भंडारी जी कर ही चुके हैं ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 9, 2015 at 3:07pm

आदरणीय बड़े भाई , छोटी बहर मे आपने ग़ज़ल खूब कही है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।  कुछ शे र शब्दों की वर्तनी  गज़ल ले लेने से बे बहर हो गये हैं ---- 

1- था  भरोसा / बहुत उनका     2122   / 1222   बहुत 12        था बहुत उनका भरोसा - किया जा सकता है 

2- पोंछ लें आं/ सू कृषक अब     2122   / 1222  कृषक 12        अब कृषक लें पोछ आँसू  - किया जा सकता है 

3- लाजिम है हो / नशा भी       22 12 , या 22 11 या 2221 /  122      लाजिम को 22 ही लेना पड़ेगा  है या हो की मात्रा गिरायी जा सकती है , जहाँ ज़रूरत हो ।     अब नशा हो , है ज़रूरी  - किया जा सकता है  । सादर !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"जय हो "
9 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175 in the group चित्र से काव्य तक
"सरसी छंद +++++++++ उषा काल आरम्भ हुआ तब, अर्ध्य दिये नर नार। दूर हुआ अँधियारा रवि का, फैले तेज…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Jan 18
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Jan 18

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Jan 18
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Jan 18
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Jan 17

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service