For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मुतदारिक मुसम्मन सालिम 

212   212   212   212

आपकी  थी  हमें  भी  बहुत  कामना

आज   संयोग   से  हो गया सामना

 

आँख से आँख अपनी मिली इस तरह

रस्म भर  ही रहा  हाथ  का थामना

 

मयकशीं  जो  करूं तो  नशा यूँ चढ़े

और  आये  कभी  हाथ में जाम ना

 

इश्क आँखों  में जब से लगा नाचने

हो  गयी  पूर्ण   सारी  मनोकामना

 

हाथ में  हाथ  ले  बात की थी कभी

याद है वह  सुहानी तुम्हें  शाम ना

 

इश्क की मय हुयी है  मयस्सर जिसे

वह  नशेड़ी  रहा  आदमी  आम ना

 

जब तलक हम जहाँ से नही जायेंगे

तब तलक  है कहाँ  कोई आराम ना 

 

 

 (मौलिक व् अप्रकाशित )

 

Views: 744

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 25, 2015 at 10:06am

आ० मिथिलेश जी

आभार सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 25, 2015 at 1:20am

आदरणीय गोपाल सर, वाह वाह क्या बढ़िया ग़ज़ल कही है बस आनंद आ गया, बस शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं 

इस शेर ने तो दिल ही लूट लिया -

आँख से आँख अपनी मिली इस तरह

रस्म भर  ही रहा  हाथ  का थामना

वाह वाह .... दाद दाद ढेर सारी दाद 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 13, 2015 at 9:53pm

प्रिय कृष्णा

मेरेपिता कह्तेथे  -आदमी जीवन भर सीखता है और अधूरा ही संसार से उठ जाता है- गजल तो मैंने अभी शुरू की . पर स्सीखने की कोई उम्र नहीं होती - कबीर जी कहते है -

कहैं कबीर जाय  दो बही  i जब ते चेतो तब ते सही  ............................ सस्नेह .

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 13, 2015 at 9:05pm

वाह! आदरणीय गोपाल सर! गज़ल पर आपके प्रयासों पर मैं नतमस्तक हूँ,आपके जैसा विद्यार्थी मिलना बहुत ही मुश्किल है,जिस पड़ाव पर अक्सर व्यक्ति अपने रचनाकर्म के मान में चूर मिलता है,उसी जगह पर हर तरह से सक्षम होते हुए भी सहज भाव से गज़ल पर आपका विद्यार्थी भाव सदैव विद्यार्थी बने रहने की मिसाल दे रहा है!अभिनन्दन!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 10, 2015 at 12:27pm

प्रिय सोमेश

आभार, सस्नेह .

Comment by somesh kumar on June 9, 2015 at 11:01pm

इश्क की मय हुयी है  मयस्सर जिसे

वह  नशेड़ी  रहा  आदमी  आम ना

  क्या बात कही आदरणीय पूरी गज़ल ही प्यार के नशे में झूम रही है |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 9, 2015 at 11:36am

आ० सुनील जी

सादर आभार .

Comment by shree suneel on June 8, 2015 at 10:43pm
आँख से आँख अपनी मिली इस तरह
रस्म भर ही रहा हाथ का थामना.... बहुत ख़ूब
अच्छी प्रस्तुति आदरणीय गोपाल नारायण सर. बधाई आपको.
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 8, 2015 at 4:31pm

आ० समीर कबीर जी

आप कमिया जरूर बताएं तभी सीख पाउँगा , सादर .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 8, 2015 at 4:30pm

आ० चौहानजी

बहुत शुक्रिया

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
7 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service