For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मैं  यहां  पर  रहूँ  या  वहां  पर  रहूँ

ऐ  खुदा  तू  बता  मैं  कहां  पर रहूँ ?

 

एक  साया   मुझे  आपका   जो  मिले

फ़िक्र क्या फिर कहाँ किस मकां पर रहूँ I

 

जिन्दगी  आज  तो  है  तिजारत हुयी   

फर्क ये है कि  मैं किस  दुकां  पर रहूँ I

 

हो  रहम  मालिकों  की मयस्सर मुझे 

पंचवक्ता  तेरी   मैं   अजां  पर  रहूँ I

 

याद   तेरी  करूं  जिन्दगी  यूँ  कटे

नाम  लेता   रहूँ  मैं  जहां  पर  रहूँ I

(मौलिक व् अप्रकाशित )

 

Views: 608

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 4, 2015 at 5:29pm

आ० महर्षि जी

आपका आभार .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 3, 2015 at 10:25pm

प्रिय कृष्णा

आभार  .

Comment by maharshi tripathi on June 3, 2015 at 10:25pm

हो  रहम  मालिकों  की मयस्सर मुझे 

पंचवक्ता  तेरी   मैं   अजां  पर  रहूँ I,,,,,,,,,,,बहुत सुन्दर  प्रणाम आपको आ. डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी |

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 3, 2015 at 10:08pm
बहुत सुन्दर गजल हुयी है आ० गोपाल नरायन सर!हार्दिक बधाई!सादर
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 2, 2015 at 10:03pm

आ० सुनील जी

आभार प्रकट करता हूँ .

Comment by shree suneel on June 2, 2015 at 9:26pm
एक साया मुझे आपका जो मिले
फ़िक्र क्या फिर कहाँ किस मकां पर रहूँ I.. ख़ूब. ..
अच्छी प्रस्तुति सर जी.
बधाइयां आपको
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 2, 2015 at 9:16pm

ARE VIJAY SIR

I MISSED YOU SO MUCH . AR E YOU O.K.?

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 2, 2015 at 8:09pm

जिन्दगी आज तो है तिजारत हुयी
फर्क ये है कि मैं किस दुकां पर रहूँ I
बहुत खूब , बधाई, आदरणीय डॉ o गोपाल नारायण जी, सादर।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 2, 2015 at 6:28pm

मनोज कुमार जी

अनुगृहीत हुआ '

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 2, 2015 at 6:27pm

आ० सौरभ जी

सादर अभिनन्दन

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
22 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
22 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
22 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
yesterday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
yesterday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service