For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक कविता सुनाता हूँ –

 

“पीडाओं के आकाश से  

चरमराती टहनियां

मरुस्थल की आकाश गंगा

की खोज में जाती हैं

धुर दक्षिण में अंटार्कटिक तक

जहाँ जंगलों में तोते सुनते हैं

भूकंप की आहट

और चमगादड़ सूरज को गोद में ले

पेड़ से उछलते है

खेलते है साक्सर

और पाताल की नीहरिकायें

जार –जार रोती हैं

मानो रवीन्द्र संगीत का

सारा भार ढोती हैं

उनके ही कन्धों पर

युग का जनतंत्र है

किया मगरमच्छ  ने

फिर कोई षड्यंत्र है

समय की पूँछ

अब बन्दर के हाथों में

स्वर्ग से आया था दूत

पिछली बरसातों में

बतला गया था वह

सूनामी आयेगी

नया जीवन लायेगी I”

 

यह मेरी कविता है

न मानो तो अकविता है

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म

शब्द हों, अपार्थ हो

मिला-जुला स्वार्थ हो

समझ में न आये जो

वीणापाणि चाहें तो

समझा न पायें जो

वह मेरी कविता है

ऊपर गढ़ी है

अक्षरशः कढ़ी है

अर्थ यदि बताओगे

सुविज्ञ कहलाओगे

वर्ना इस समाज में

लतियाये जाओगे   

मैंने रचा है

और मेरा मन करता है

इस कविता को

शतशः नमन

माफ़ करना मुझको

मैथिली शरण

क्योंकि

अतुकांत का चरित्र स्वयं एक काव्य है

कोई कवि बन जाये सहज संभाव्य है

.

(मौलिक व् अप्रकाशित )  

Views: 516

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 30, 2015 at 4:15pm

आ० मिथिलेश जी

सादर आभार .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 30, 2015 at 4:14pm

आ० समर कबीर जी

सादर आभार .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 30, 2015 at 4:13pm

आ० सौरभ जी

आपके प्रोत्साहन को नमन . सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 30, 2015 at 4:12pm

आ० केवल जी

आपका आभार .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 29, 2015 at 11:11pm

बहुत बढ़िया सर, 

ये विषय.... सीधा व्यंग्य .... क्या कहूं..... पूरा समर्थन सौ टका

Comment by Samar kabeer on May 29, 2015 at 12:18am
आली जनाब डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,आदाब,बहुत ही अच्छी कविता लिखी है आपने ,सुनने के बाद मैं इसकी गहराई में तैर रहा हूँ,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाऐं ।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 28, 2015 at 11:35pm

हा हा हा... .

आपके सहज संभाव्य कविपने को नमन..  :-)))))

खूब बढ़िया ! इस खुले व्यंग्य के लिए हार्दिक बधाई..

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 28, 2015 at 9:04pm

//पीडाओं के आकाश से  

चरमराती टहनियां

उनके ही कन्धों पर

युग का जनतंत्र 

फिर कोई षड्यंत्र है

मिला-जुला स्वार्थ 

मेरी कविता है

ऊपर गढ़ी 

अक्षरशः कढ़ी है

यही है कविता का मर्म

सारा भार ढोती हैं

नया जीवन 

अतुकांत का चरित्र स्वयं एक काव्य है

कोई कवि बन जाये सहज संभाव्य है//

.आ0 गोपाल भाई जी--------मेरी समझ में तो यही कविता का प्रारूप है,------सुंदर अभिव्यक्ति के लिये हार्दिक बधाई. सादर

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
7 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service