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सौदा : लघु कथा : हरि प्रकाश दुबे

“आपकी लड़की हमको बहुत पसंद है !”

“ बहुत –बहुत शुक्रिया आप दोनों का !”

“ बस बहन जी, थोडा लेन- देन की बात भी...!”

“हाँ-हाँ  क्यों नहीं, भाई-साहब, बहन जी  बताइये- बताइये ?”

“ अरे आप तो जानती हीं हैं आजकल का चलन, और फिर मेरा लड़का अच्छा खासा सरकारी इंजीनीयर है , कम से कम ४० लाख नकद और एक गाडी तो बनती ही है !”  

“ अरे बस , मैं तो अपनी बिटिया के लिए कुछ ज्यादा ही सोच कर बैठी हूँ !”

“ अरे वाह , कितना .. लड़के के पिता चहकते हुए बोले !”

“ जी, मुझे तो सिर्फ ८० लाख नकद चाहिए, अब देखिये ना इसके पिता भी नहीं हैं, कितनी बड़ी डॉक्टर है , फिर जहां जायेगी अपने परिवार को जिंदगी भर कमा कर देगी , पर हाँ मेरा बुढ़ापा जरूर ठीक से कट जाएगा, और चलिए आप के लिए वो ४० लाख और गाडी का पैसा कम ..पर कम से कम ३० लाख तो मुझे चाहिये ही, अब बताइये सौदा मंजूर हो तो .. ?”

 

    © हरि प्रकाश दुबे

 "मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 616

Comment

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Comment by savitamishra on April 16, 2015 at 11:03pm

बहुत अच्छी लघुकथा

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 16, 2015 at 7:52pm

बहुत सुंदर, आदरणीय हरिप्रकाश जी. काश! ऐसा करारा जबाब ,हर लड़की का पिता देना सीख ले. बधाई प्रस्तुति पर

Comment by Neeraj Neer on April 16, 2015 at 5:44pm

वाह ... करारा जवाब। सुंदर संदेशप्रद लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई ॥ 

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 16, 2015 at 4:28pm
अच्छी लघु- कथा , बधाई , आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 16, 2015 at 4:01pm

लाजवाब करने वाला जवाब मिला है । आदरणीय हरि भाई आपको कथा के लिये दिली बधाइयाँ ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 16, 2015 at 1:50pm

जैसे को तैसा मिला..

बहुत खूब !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 16, 2015 at 12:53pm

आ० हरी प्रकाश जी

आपने  कटाक्ष   बहुत अच्छा किया है i  सादर.

Comment by Shyam Narain Verma on April 16, 2015 at 10:54am
बहुत बढ़िया कहानी , हार्दिक बधाई आपको
Comment by विनय कुमार on April 16, 2015 at 10:36am

आज कल लड़कीवालों को इसी तरह बोलने की जरुरत है । बढ़िया लघुकथा आदरणीय..

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 16, 2015 at 10:27am

अच्छा सौदा है ...काश ऐसे बोल हमारे समाज से लड़कीवालों के मुख से निकलने लगे....

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