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“अरे!! भाई.. दोनों में से एक बैल तो अभी दांत वाला है, ठीक से कीमत बता. फिर बिना दांत वाला वैसे ही लेजा, उसका क्या करूँगा मैं..? आखिर खली-भूसा भी महंगा पड़ता है..”

“पटेल भैया .. दांत वाले की ही कीमत है, बुढ्ढे बैल को मुझ से भी कौन खरीदेगा..? यहीं खूंटे भी ही मरने दो..”

नजदीक ही पटेल भैया के बीमार पिता, चारपाई पर पड़े सारी बातें सुन रहे थे...

 

  जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 25, 2015 at 10:22am

आपका आत्मीय आभार ,आदरणीय निलेश जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 25, 2015 at 10:22am

आपके प्रोत्साहन से बहुत मनोबल मिलता है, आदरणीय जवाहर जी. ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 25, 2015 at 10:21am

लघुकथा पर आपकी उपस्थिति हेतु आपका ह्रदय से आभार, आदरणीय डा.आशुतोष जी

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 25, 2015 at 10:20am

रचना आपका आशीर्वाद पाकर,धन्य हुई आदरणीय विजय जी. ह्रदय से आभारी हूँ

सादर!

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 25, 2015 at 8:35am

बहुत खूब ...

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 24, 2015 at 10:21pm

जितेन्द्र जी, आपकी लघुकथा का जवाब नहीं....बहुत सटीक 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 24, 2015 at 2:35pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी ..अंतस को झकझोरती इस शानदार लघु कथा के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by vijay nikore on March 24, 2015 at 10:55am

 सदैव समान सुन्दर मार्मिक लघुकथा। बधाई।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 24, 2015 at 10:44am

लघुकथा पर आपकी स्नेहिल सराहना के लिए ,ह्रदय से आभारी हूँ आदरणीया राजेश दीदी.

सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 24, 2015 at 10:42am

आदरणीय कृष्णा जी. आपकी लघुकथा पर पुन: उपस्थिति हेतु आपका आभारी हूँ. रचना में दो पात्र है विक्रेता और क्रेता. विक्रेता को इनपुट के अनुसार सही आउटपुट नही मिल पा रहा है याने की बिना दांत का बैल ,जिसे क्रेता ने बुजुर्ग कहा है. बैल जब तक स्वस्थ और युवा होता है ताकतवर रहता है और इंसान को उसकी ताकत से ही आउटपूट मिलता है दांत गिरने के बाद बैल उतना खा नही पाता ,जितना की उससे काम लिया जा सके. ऐसे जानवरों को पालने वाले उन पर पूरा ध्यान देते है उनकी खुराक एकदम से कम हो जाना अक्सर उनकी बीमारी की तरफ ही इशारा करती है.

सादर!

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