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भँवरा हूँ ......
फूल दर फूल घूमना आदत मेरी
हर फूल को चूमना चाहत मेरी
फूल कहाँ पहचानते हैं मुझे
मेरे जैसे कई आते हैं हर रोज़ 
बिन बुलाये यहाँ !
मेरी तो फ़ितरत है
नये मन्ज़र ढूँढ़ना
रुक तो तभी पाऊंगा
जब किसी फूल के
ख़ूनी पंजों में जकड़ा जाऊंगा
वर्ना उड़ता उड़ता
बहुत दूर निकल जाऊंगा.........

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by maharshi tripathi on March 18, 2015 at 10:01pm

इस सुन्दर रचना पर आपको हार्दिक बधाई आ. Mohan Sethi 'इंतज़ार जी |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 18, 2015 at 9:40am

बहुत बहुत बधाई आदरणीय मोहन सेठी जी इस रचना के लिये

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 18, 2015 at 4:28am

आदरणीय ...आप सभी को हार्दिक आभार इस रचना को सराहने के लिये ...Er. Ganesh Jee "Bagi" जी गलती सुधार दी गई है धन्यवाद ...आप लोग ऐसे ही मार्गदर्शन करते रहें तो साहस बना रहेगा !....सादर  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 17, 2015 at 10:02pm

//रुक तो तभी पाऊंगा
जब किसी फूल के
ख़ूनी पंजों में जकड़ा जाऊंगा//

सुन्दर कविता, इस अभिव्यक्ति हेतु बधाई आदरणीय मोहन सेठी जी.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 17, 2015 at 9:47pm

बहुत सुन्दर !! आदरणीय मोहन भाई , हार्दिक बधाई ।

Comment by Hari Prakash Dubey on March 17, 2015 at 7:52pm

आदरणीय मोहन सेठी जी,  ,सुन्दर रचना ,बधाई प्रेषित ! सादर

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 17, 2015 at 4:15pm

रुक तो तभी पायूँगा
जब किसी फूल के
ख़ूनी पंजों में जकड़ जाऊंगा
वर्ना उड़ता उड़ता
बहुत दूर निकल जाऊंगा.........---------------- अति सुन्दर  .आ० मोहन सेठी जी .सादर .

Comment by Shyam Narain Verma on March 17, 2015 at 3:26pm
सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ ।
Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 17, 2015 at 3:20pm
आदरणीय इंतजारजी। सुन्दर रचना के लिये बधाई स्वीकारे।
Comment by Shyam Mathpal on March 17, 2015 at 12:08pm

Aadarniya Mohan sethi ji,

Kya baat hai. Kya baat hai.  sundar bhav....sundar rachna.. Dheron badhai.

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