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ग़ज़ल (आलोक मित्तल)

कौन आया है अजनबी देखो !
खुशनुमाँ आज जिन्दगी देखो II

ध्यान देना ज़रा नजर भरके !
बैठ कर खूब सादगी देखो II

देख लो ठोक औ बजा करके I
ठीक सा कोइ आदमी देखो II

प्यार का अब हुआ असर ऐसा !
आप इसकी नई कमी देखो !!

हर तरफ चल रही सफाई है !
पर फिजाओं में गंदगी देखो !!

देखिये बँट रही मिठाई है !
कौन है फिर यहाँ दुखी देखो !!

जीत ली प्यार से मुहब्बत भी !
आज आलोक की ख़ुशी देखो !!

("मौलिक व अप्रकाशित")

** आलोक **

मथुरा

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Comment

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Comment by Alok Mittal on November 6, 2014 at 10:58am

आ. जितेन्द्र पस्टारिया जी......मेरा हौसला बढाने का आपका बहुत बहुत आभार

Comment by Alok Mittal on November 6, 2014 at 10:57am

आ. डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी.....हौसला बढाने का आपका सादर आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 6, 2014 at 7:51am

बहुत अच्छी लगी आपकी गजल, आदरणीय आलोक जी. सामयिक शेरों पर अनेकानेक बधाई आपको

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 5, 2014 at 4:02pm

सुन्दर रचना i  बधाई हो i

Comment by Alok Mittal on November 5, 2014 at 11:31am

आ. umesh katara जी.....हौसला बढाने का आपका सादर आभार

Comment by Alok Mittal on November 5, 2014 at 11:30am

आ. गिरिराज भंडारी जी....मेरा हौसला बढाने का आपका बहुत बहुत आभार

Comment by umesh katara on November 5, 2014 at 9:05am

बहुत बढिया ग़ज़ल कही है सर
---------हर तरफ चल रही सफाई है 
पर फिजाओं में गन्दगी देखो
वाहहहहहहहहहहह तात्कालिक


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 4, 2014 at 5:54pm

आदरणेय आलोक भाई , बढिया ग़ज़ल कही है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Alok Mittal on November 3, 2014 at 12:43pm

आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी .....आप सब का आशीर्वाद और स्नेह मिलता रहे ...कोशिश सदा रहेगी अच्छा करने की ..आभार आपका


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 11:20am

ग़ज़ल कहने का बढ़िया प्रयास है आ० आलोक मित्तल जी, बधाई स्वीकारें एवं प्रयासरत रहें।

कृपया ध्यान दे...

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