For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (आलोक मित्तल)

कौन आया है अजनबी देखो !
खुशनुमाँ आज जिन्दगी देखो II

ध्यान देना ज़रा नजर भरके !
बैठ कर खूब सादगी देखो II

देख लो ठोक औ बजा करके I
ठीक सा कोइ आदमी देखो II

प्यार का अब हुआ असर ऐसा !
आप इसकी नई कमी देखो !!

हर तरफ चल रही सफाई है !
पर फिजाओं में गंदगी देखो !!

देखिये बँट रही मिठाई है !
कौन है फिर यहाँ दुखी देखो !!

जीत ली प्यार से मुहब्बत भी !
आज आलोक की ख़ुशी देखो !!

("मौलिक व अप्रकाशित")

** आलोक **

मथुरा

Views: 665

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Alok Mittal on November 6, 2014 at 10:58am

आ. जितेन्द्र पस्टारिया जी......मेरा हौसला बढाने का आपका बहुत बहुत आभार

Comment by Alok Mittal on November 6, 2014 at 10:57am

आ. डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी.....हौसला बढाने का आपका सादर आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 6, 2014 at 7:51am

बहुत अच्छी लगी आपकी गजल, आदरणीय आलोक जी. सामयिक शेरों पर अनेकानेक बधाई आपको

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 5, 2014 at 4:02pm

सुन्दर रचना i  बधाई हो i

Comment by Alok Mittal on November 5, 2014 at 11:31am

आ. umesh katara जी.....हौसला बढाने का आपका सादर आभार

Comment by Alok Mittal on November 5, 2014 at 11:30am

आ. गिरिराज भंडारी जी....मेरा हौसला बढाने का आपका बहुत बहुत आभार

Comment by umesh katara on November 5, 2014 at 9:05am

बहुत बढिया ग़ज़ल कही है सर
---------हर तरफ चल रही सफाई है 
पर फिजाओं में गन्दगी देखो
वाहहहहहहहहहहह तात्कालिक


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 4, 2014 at 5:54pm

आदरणेय आलोक भाई , बढिया ग़ज़ल कही है , दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ।

Comment by Alok Mittal on November 3, 2014 at 12:43pm

आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई जी .....आप सब का आशीर्वाद और स्नेह मिलता रहे ...कोशिश सदा रहेगी अच्छा करने की ..आभार आपका


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 11:20am

ग़ज़ल कहने का बढ़िया प्रयास है आ० आलोक मित्तल जी, बधाई स्वीकारें एवं प्रयासरत रहें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
16 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service