For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

1222- 1222- 1222

मुनव्वर शाम के रंगीं नज़ारों में

नुमायाँ फूल हों जैसे बहारों में

 

कहीं कम हो न जाये बज़्म की रौनक

लगा दो कुछ दिये भी चाँद तारों में

 

फ़रोग़े शम्अ महफिल में लगे है यूँ

झलकता हुस्न हो जैसे हज़ारों में

 

लकीरें धूप की झाँके दरीचे से

सवेरा छुप के बैठा है दरारों में

 

न जाने रंग कितने रोज़ भर जाये

ये नूरे शम्स झीलों कोहसारों में

 

हवा के सामने शिद्दत से जलती लौ

यूँ हिम्मत दे गई हमको इशारों में

 

न रखिये हर दफ़े आरज़ू उजालों की

मिले तो मुस्तहब है रहगुज़ारों में

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 866

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 26, 2014 at 8:27pm

आदरणीय विजय निकोर सर रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 26, 2014 at 8:26pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार

Comment by vijay nikore on October 21, 2014 at 2:56am

बहुत ही खूबसूरत गज़ल है... हार्दिक बधाई।

Comment by MAHIMA SHREE on October 19, 2014 at 9:24pm

न रखिये हर दफ़े आरज़ू उजालों की

मिले तो मुस्तहब है रहगुज़ारों में....वाह ....बेहद उम्दा ..हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 19, 2014 at 7:14pm

आदरणीय जितेन्द्र जी आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 19, 2014 at 7:14pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण सर आपका शुक्रिया। माफी चाहता हूँ इस बार गलती हो गई। फ़रोग़ का अर्थ है ज्योति, कोहसार का अर्थ है पर्वतमाला।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 19, 2014 at 7:10pm

आदरणीया राजेश दीदी आपका बहुत बहुत शुक्रिया सुझाव के लिये आभार अभी सुधार देता हूँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 19, 2014 at 7:10pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर आपका बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 19, 2014 at 10:37am

लाजवाब गजल कही आपने आदरणीय शिज्जू जी. हर एक शेर तारीफ़ के काबिल हुआ

हवा के सामने शिद्दत से जलती लौ

यूँ हिम्मत दे गई हमको इशारों में.......बेहद सुंदर. लाखों बधाइयाँ आपको

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on October 18, 2014 at 12:20pm

क्या बात है ?

उर्दू के कुछ कठिन  शब्द के अर्थ मिल जाते तो आनंद बढ़ जाता i इस बार आप भूल गए i पर आगे अर्थ जरूर दीजियेगा i  फरोगे / कोहसार  समझ में नहीं आये  i पर फिर भी मजा आया i  सस्नेह i

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service