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'दीप जलाएँ....

मावस का तम घना मिटाएँ
आओ सब मिल
दीप जलाएँ।

महकाएँ घर आँगन द्वारे
स्वच्छ करें गलियाँ चौबारे
कटुता के सब महल ढहाएँ
हिलमिलकर यह
पर्व मनाएँ।

अम्बर का तम मिट ना पाया
अनगिन तारे थाल सजाया
तम की शिला भेद जो पाएँ
दीप माल से
धरा सजाएँ।

घर जो उजियारे को तरसे
माँ लक्ष्मी की कृपा यूँ बरसे
दीप पर्व वो सभी मनाएँ
खील बतासे
ना मुरझाएँ।
आओ मिल सब
दीप जलाएँ।
सीमा हरि शर्मा 07.10.2014
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 772

Comment

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Comment by seemahari sharma on October 13, 2014 at 5:29pm
बहुत बहुत धन्यवाद Meena Pathak जी। इसी तरह अपना स्नेह बनाएं रखें।
Comment by seemahari sharma on October 12, 2014 at 11:28pm
आदरणीय Vijay Nikore जी बहुत बहुत आभार आपका आपने रचना पसंद कर प्रोत्साहित किया ।सादर
Comment by Meena Pathak on October 12, 2014 at 12:38pm

आओ सब मिल दीप जलाएं ................बहुत सुन्दर रचना , हार्दिक बधाई आदरणीया सीमा जी 

Comment by vijay nikore on October 12, 2014 at 12:15pm

दीपावली के अवसर पर आपकी यह रचना अच्छी लगी। हार्दिक बधाई, आदरणीया सीमा जी।

Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 11:40pm
आदरणीय शिज्जु "शकुर"जी बहुत बहुत आभार आपने रचना को सराहा।
Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 11:37pm
बहुत बहुत शुक्रिया Vinod khanagwal जी।रचना ने आपको प्रभावित किया।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 8, 2014 at 10:16pm

आदरणीया सीमा जी बेहतरीन गीत लिखा है आपने बहुत बहुत बधाई हो

Comment by विनोद खनगवाल on October 8, 2014 at 5:05pm
सीमा जी बहुत ही निर्मल निमंत्रण है आपका। सारे गिले शिकवे मिटाकर मिलकर खुशियाँ मनाने का। अब क्या कहूँ मैं तो मोहित हो गया रचना पर।
Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 4:51pm
आदरणीय Dr.Vijai Shankerजी बहुत बहुत आभार आपका आपने रचना को पसंद कर उत्साहवर्धन किया
Comment by seemahari sharma on October 8, 2014 at 4:47pm
भाई जितेन्द्र'गीत'जी बहुत बहुत शुक्रिया आपकी प्रतिक्रिया से संतोष मिला।पुन:शुक्रिया

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