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मंथर गति से

थमा नहि पल कोई सुहाना
बीत सदा जाता है।
मंथर गति से घट जीवन का
रीत सदा जाता है।

सींचा एक एक पौधा तब
वन उपवन लहराते।
अनजाने से सन्नाटे ये
चुपके चुपके आते।
बड़ा तिलस्मी मरूथल
पग पग
जीत सदा जाता है

अल सुबहा के स्वपन सजीले
दिन भर धूम मचाते।
ऊषा के स्वर्णिम चंचल रँग
साँझ ढले थक जाते।
श्याम निशा के रँग
से जीवन
भीत सदा जाता है
मंथर गति से घट जीवन का
रीत सदा जाता है।

.
सीमा हरि शर्मा 30.09.2014
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 772

Comment

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Comment by seemahari sharma on October 5, 2014 at 8:31pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी बहुत बहुत आभार आपका आपने रचना पसंद की रचना कर्म सफल हुआ सादर
Comment by seemahari sharma on October 5, 2014 at 8:29pm
आदरणीय Sulabh Agnihotri जी ह्रदय से आभार आपका आपने रचना को पसंद किया सादर
Comment by seemahari sharma on October 5, 2014 at 8:25pm
आदरणीय Vijay Prakash Sharma जी बहुत बहुत आभार आपका सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 2, 2014 at 9:47pm

सींचा एक एक पौधा तब
वन उपवन लहराते।
अनजाने से सन्नाटे ये
चुपके चुपके आते।
बड़ा तिलस्मी मरूथल
पग पग
जीत सदा जाता है -------- बहुत सुन्दर , आदरणीया सीमा हरि जी , हार्दिक बधाई |

Comment by Sulabh Agnihotri on October 2, 2014 at 9:13pm

पूरा गीत बहुत सुन्दर है सीमा जी। मुझे निम्नलिखित पंक्तियां विशेष प्रभावी लगीं।
बधाई !

अल सुबहा के स्वपन सजीले
दिन भर धूम मचाते।
ऊषा के स्वर्णिम चंचल रँग
साँझ ढले थक जाते।
श्याम निशा के रँग
से जीवन
भीत सदा जाता है
मंथर गति से घट जीवन का
रीत सदा जाता है।

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on October 1, 2014 at 6:49pm

"मंथर गति से घट जीवन का
रीत सदा जाता है।" बहुत बधाई सीमा जी ,
वाह!! जीवन के सत्य का अद्भुत चित्रण,परन्तु दुर्भाग्य मनुष्य इसे पर ध्यान कहाँ दे पाता है,वह तो जीवन की आपाधापी में ही उलझा रह जाता है.

Comment by seemahari sharma on October 1, 2014 at 10:37am
ह्रदय से धन्यवाद भाई जितेन्द्र'गीत' जी इसी तरह पूरा जीवन कब बीत जाता है पता नहीं चलता
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 1, 2014 at 10:17am

पूर्ण रचना में बड़े सुंदर भाव उभर कर आये है , आदरणीया सीमा जी. सच! सब कुछ धीमे-धीमे पलों में बीत जाता है जीवन की खुशिया भी और गम भी. बहुत-२ बधाई आपको

Comment by seemahari sharma on October 1, 2014 at 10:09am
Pawan Kumar जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका
Comment by seemahari sharma on October 1, 2014 at 10:07am
आदरणीय Shyam Narain verma बहुत बहुत आभार आपका

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