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कुण्डलिया ( चिंता व चिंतन )

(सभी गुरुजनों की समीक्षार्थ ... सादर -)

चिंता चित पर ज्यों चढ़े, पल-पल मन झुलसाय|

चिंता रथ पर  जो चढ़े, चिता तलक पहुँचाय ||

चिता तलक पहुँचाय , रहे तन छिन-छिन घुलता |

छिने दिमागी चैन , नींद से वंचित फिरता ||

देत न कोय उपाय, सुख व सेहत की हंता |

करें  चिंतन सदैव, करें न कभी भी चिंता ||

.

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Madan Mohan saxena on July 3, 2014 at 4:52pm

बहुत सुंदर.हार्दिक बधाई शालिनी जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 3, 2014 at 2:45pm

आदरणीया शालिनी जी 

कुण्डलिया छंद पर सार्थक कथ्य को प्रस्तुत करने का सुन्दर प्रयास हुआ है..और मात्रिकता निर्वहन भी सम्यक हुआ है...इस पर आपको बहुत बहुत बधाई 

लेकिन प्रस्तुति की शैली के साथ झुलसाय पहुँचाय देत कोय जैसे आंचलिक शब्द आरोपित से लग रहे हैं..जिनसे बचा जा सकता था 

साथ ही शब्द समुच्चयों में आतंरिक व्यस्था पर भी कुछ और कसावट की ज़रुरत है.. 

http://www.openbooksonline.com/group/chhand/forum/topics/5170231:To...

इस लिंक पर शब्द संयोजन के विन्यास को पुनः अवश्य ही देखें 

शुभकामनाएं 

Comment by shalini rastogi on June 27, 2014 at 9:40am

आदरणीय गिरिराज भंडारी  जी , आपका अनुमोदन मेरे लिए गर्व का विषय है .. मार्गदर्शन बनाए रखिये .. 

Comment by shalini rastogi on June 27, 2014 at 9:32am

उत्साह वर्द्धन के लिए आभार  coontee mukerji जी एवं जितेन्द्र 'गीत' जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 26, 2014 at 11:22pm

आज के इस आपा-धापी वाले समय में सिर्फ चिंताएं ही रह गई है, बहुत अच्छा सन्देश देती रचना. बधाई स्वीकारें आदरणीया शालिनी जी

Comment by coontee mukerji on June 26, 2014 at 10:21pm

बहुत सुंदर.....हार्दिक बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 26, 2014 at 7:21pm

आदरनीया शालिनि जी , सुन्दर सार्थक संदेश देती कुन्दलिया रचना के लिये बधाइयाँ ।

Comment by shalini rastogi on June 24, 2014 at 11:21am

धन्यवाद आदरणीय Laxman Prasad Ladiwala जी .. आपका सुझाव बहुत उपयुक्त है .. आगे भी मार्गदर्शन की अभिलाषा है .. सधन्यवाद !

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 24, 2014 at 11:05am

सार्थक सन्देश देती कुंडलिया छंद के प्रयास हेतु बधाई | कुछ शब्द लय की द्रष्टि से ठीक किये जा सकते है | जैसे -

करें  चिंतन सदैव की जगह - "चिंतन करे सदैव" अधिक उपयुक्त रहेगा 

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