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उसे मजदूरी में जितने रूपये मिले थे उसकी रोटियाँ खरीदी और खाने के बाद दो रोटियाँ बचा ली, उसने सोचा कल पता नहीं काम मिले या नहीं, इतने में उसकी नज़र एक बच्चे पर पड़ी वो उन रोटियो की तरफ कातर दृष्टि से देख रहा था। उसे दया आ गई, उसने रोटियाँ उस बच्चे को दे दी।

 

उधर -  एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में शादी थी मेहमानों के चले जाने के बाद काफी खाना बच गया था इतना कि कम से कम 20 भूखे पेट भर सकते थे। मेजबान से पूछा गया इस खाने का क्या करें ? ……………?

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by शिज्जु "शकूर" on April 11, 2014 at 8:07am

आदरणीया डॉ प्राची जी आपका हार्दिक आभार जो आपने रचना को सराहा l मैं अक्सर भोजन को बर्बाद होते देखता हूँ, देश में इतनी मँहगाई और अनाज व पोषण की उपलब्धता मे कमी के बावजूद ऐसा होना कुछ अच्छा नहीं लगता है, बस मैं यही कहना चाहता हूँ अपने  स्तर पर हर व्यक्ति अनाज की बर्बादी को कम करे भोजन का सही उपयोग करे ताकि ज़रूरतमंदो एवं गरीबों को भूखे न सोना पड़े।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 11, 2014 at 8:00am

आदरणीय मीना जी रचना की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 10, 2014 at 4:51pm
समाज में ऐसी दोरंगी तस्वीरें व्याप्त हैं और हर सजग संवेदनशील मनुष्य को ये स्पंदित भी करती हैं... सशक्त कथ्य लगा इस लघु कथा का..

दुसरे परिदृश्य में "घटना क्र० 2" की जगह सिर्फ "उधर" भी लिखा जा सकता है, घटना क्रम 2 पढने पर लिंक टूट सा रहा है......... विचार कीजिये.

इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई
Comment by Meena Pathak on April 9, 2014 at 4:20pm

कभी कभी किसी सवाल का जवाब ढूंढे से भी नही मिलता .... सुन्दर लघुकथा .. बधाई आ० शिज्जू जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 8, 2014 at 12:49pm

आदरणीय विजय सर आपने रचना के मर्म को समझा सराहा आपका बहुत बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 8, 2014 at 12:47pm

आदरणीय जितेन्द्र भाई आपका हार्दिक आभार आपने रचना की मर्म को समझा


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 8, 2014 at 12:45pm

आदरणीय बृजेश जी मेरी रचना को समय देने के लिये आपका हार्दिक आभार

Comment by vijay nikore on April 8, 2014 at 12:28pm

बहुत बढ़िया सवाल और संदेश। बधाई।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 7, 2014 at 11:05pm

बढ़िया प्रश्न साझा किया आपने आदरणीय शिज्जू  जी

Comment by बृजेश नीरज on April 6, 2014 at 8:11pm

महत्वपूर्ण प्रश्न!

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