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ग़ज़ल - दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

आज मजलूम को सताओगे

बददुआ सात जन्म पाओगे

 

बह्र ग़ालिब की खूब लिख डालो

दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे

 

खुद को भगवान मान  बैठेगा

हद से ज्यादा जो सिर झुकाओगे

 

आज साहब बने हो रैली में

कल तुम्हीं झुनझुना बजाओगे

 

खूब खोजी बने थे हाकिम के

अब हुनर जेल में दिखाओगे

 

अमित दुबे मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by अमित वागर्थ on March 24, 2014 at 12:02pm

आप सभी सुधीजनों का ग़ज़ल अनुमोदन हेतु ह्रदय से आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 14, 2014 at 7:00pm

आखीरी शेर पर और समय दिया जाता  .. अन्य अश’आर के लिए बधाई


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 4, 2014 at 12:44pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है आ० अमित जी 

बह्र ग़ालिब की खूब लिख डालो

दिले-ग़ालिब कहाँ से लाओगे...................वाह ! 

 

आज साहब बने हो रैली में

कल तुम्हीं झुनझुना बजाओगे................येभी बहुत बढ़िया 

इस सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई प्रेषित है 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 23, 2014 at 7:39pm

वाह कमाल की ग़ज़ल ..आनंद आ अगया ..अमित जी तहे दिल बधाई स्वीकार करें ..सादर 

Comment by ram shiromani pathak on February 22, 2014 at 4:42pm

 आदरणीय अमित भाई , सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइ.

Comment by Shyam Narain Verma on February 22, 2014 at 3:31pm
बहुत सुन्दर गज़ल ..................
Comment by ajay sharma on February 21, 2014 at 11:13pm

waqt -e- halaat pe khoobsoorat gazal kahi hai ....

Comment by बृजेश नीरज on February 21, 2014 at 7:50pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on February 20, 2014 at 11:25pm

खुद को भगवन मान बैठेगा

हद से ज्यादा जो सिर झुकाओगे...........वाह! कटु सत्य लिए हुए

हार्दिक बधाई आदरणीय अमित जी

 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 20, 2014 at 10:55pm

आदरणीय अमित भाई , एक  अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाइ.

कृपया ध्यान दे...

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