For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल- सारथी || इशारों से दिल का जलाना तेरा ||

इशारों से दिल का, जलाना तेरा

अजब! हुस्नवाले, बहाना तेरा /१ 

हमें क्या फ़िकर, ग़र जमाना कहे

दीवाना- दीवाना, दीवाना तेरा /२ 

हुआ जब से रिश्ता, हयाई बढ़ी

यूँ साड़ी पहन के, लजाना तेरा /३ 

अभी तो जवां हूँ, है गुंजाइशें

जिगर पे उठा लूँ, निशाना तेरा /४  

न नासाज कर दे, कहीं आपको

सनम सर्दियों में, नहाना तेरा /५  

बड़प्पन कहीं से, दिखे तो कहूँ

सुना तो, बड़ा है घराना तेरा /६ 

ये तेवर, ये अंदाज़, आसां नहीं

ग़ज़ल, 'सारथी' जी सुनाना तेरा /७ 

...............................................

अरकान: १२२१  २२१२  २१२

सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 625

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 5, 2014 at 12:58am

बड़प्पन कहीं से, दिखे तो कहूँ

सुना तो, बड़ा है घराना तेरा .. . .इस शेर पर बहुत सारा वज़्न है. 

कई शेर मोहक लगे हैं

इस कोशिश के लिए हार्दिक बधाई.. .

Comment by Saarthi Baidyanath on February 23, 2014 at 7:04pm

आदरणीय  Neeraj Kumar 'Neer' जी , नमन स्वीकार करें !..बहुत बहुत धन्यवाद ! स्नेह देते रहिएगा !

Comment by Saarthi Baidyanath on February 19, 2014 at 10:28am

जनाब  शिज्जु शकूर  साहब, आपकी इनायतों का शुक्रगुजार हूँ ! शुक्रिया बहुत बहुत ....!

Comment by Neeraj Neer on February 19, 2014 at 8:36am

बहुत  सुन्दर ग़ज़ल ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on February 18, 2014 at 8:46pm

भाई सारथी जी अच्छी ग़ज़ल कही है आपने बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Saarthi Baidyanath on February 18, 2014 at 11:43am

मान्यवर गिरिराज भंडारी जी , आप बिल्कुल वाजिब फरमा रहे हैं ..! मैं इसे अतिशीघ्र सुधार कर लूँगा ! आपके इस अमूल्य मार्गदर्शन हेतु कोटिशः आभार व नमन ! श्रीमान, दीवाना लिखने से ग़ज़ल मान्य तो होगा न ?  स्नेह देते रहिएगा ! विनीत !

Comment by Saarthi Baidyanath on February 18, 2014 at 11:42am

आदरणीय  laxman dhami साहब , दिली शुक्रगुजार हूँ जो नाचीज की ग़ज़ल पसंद आई ! सादर नमन सहित :)

Comment by Saarthi Baidyanath on February 18, 2014 at 11:39am

आदरणीय  ram shiromani pathak जी , बहुत मेहरबानी आपकी ! सादर अभिनन्दन आपका !

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 18, 2014 at 7:49am

आदरनीय भाई वैद्य नाथ जी, बहुत खूबसूरत गज़ल कही है, हार्दिक बधाइयाँ.  भाई गिरिराज जी की सलाह पर जरूर विचार करें .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 17, 2014 at 10:33pm

आदरनीय वैद्य नाथ भाई , बहुत खूबसूरत गज़ल कही है , सभी अशआर सुन्दर हैं ॥ आपको दिली बधाइयाँ ॥ बस दिवाना खटक रहा है , सही शब्द दीवाना है , और वो भी तीन बार  , थोड़ा सोच के देखियेगा ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service