For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नवगीत--(उदासी गर्इ भौंरा फिर गुनगुनाया)

हॅसी रूप कलियों का जब मुस्कुराया,
उदासी गर्इ भौंरा फिर गुनगुनाया।।

बहारों की रानी,

राजनीति पुरानी।
नर्इ-नर्इ कहानी,

जवानी-दीवानी।
महगार्इ बढ़ाकर,

नववधू घर आती।
दिशाएं भी छलती,

गरीबी की थाती।
अमीरों का राजा, अल्ला-राम आया।। 1

सजाते हैं संसद,

समां बर्रा छत्ता।
परागों को जन से,

चुराती है सत्ता।
अगर रोग-दु:ख में,

पुकारे भी जनता।
शहर को जलाकर,

कमाते हैं भत्ता।
चुनावों का सस्ता गल्ला शाम आया।। 2

तरसती है शिक्षा,

बिलखती है दीक्षा।
चलन से छले न्याय,

सत, करती प्रतीक्षा।
चिकित्सा की मर्जी,

अनिशिचत है भिक्षा।
उधारी में लटके,

किसानों की इच्छा।
नहीं बिजली-पानी, हल्ला काम आया।। 3

के0पी0 सत्यम मौलिक व अप्रकाशित


Views: 627

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 20, 2014 at 8:42pm

आ0 नीरज भार्इजी, आशुतोष भार्इजी व निकोर सर जी, आप सभी का बहुत-बहुत हार्दिक आभार। सादर,

Comment by vijay nikore on February 20, 2014 at 2:15am

अच्छे बिम्ब और भाव हैं... आपको रचना के लिए बधाई।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on February 14, 2014 at 4:38pm

आदरणीय केवल जी ..

अगर रोग-दु:ख में,

पुकारे भी जनता।
शहर को जलाकर,

कमाते हैं भत्ता।
चुनावों का सस्ता गल्ला शाम आया।। ..इस बेहतरीन नवगीत की इन बिशेष पंक्तियों के लिए तहे दिल बधाई सादर 

Comment by Neeraj Neer on February 13, 2014 at 6:52pm

नहीं बिजली-पानी, हल्ला काम आया। बहुत यथार्थ परक रचना .. सुन्दर ..

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 7, 2014 at 7:00pm

आदरणीय सौरभ सर जी, सादर प्रणाम! आपका हार्दिक आभार। सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 7, 2014 at 6:59pm


आदरणीय अन्नपूर्णा जी एक बार फिर आपका हार्दिक आभार। सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 6, 2014 at 4:32pm

कई बिम्ब ध्यान खींचते हैं. अच्छे हैं. इस रचना के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

Comment by annapurna bajpai on February 6, 2014 at 1:56am

सुंदर नव गीत बधाई आपको आ0 केवल भाई जी । 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on February 5, 2014 at 8:37pm

आ0 अन्नपूर्णा जी आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by annapurna bajpai on February 4, 2014 at 11:38pm

सुंदर नवगीत आ0 केवल भाई जी , बधाई आपको । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service