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लघुकथा -बहुरूपिया

हनुमान के रूप मे लोगों से भिक्षा माँग गुजर बसर कर रहे बहुरूपिये पर बङे आतंक वादी गिरोह के लिए काम करने वालों की नजर पङी।उनका आदमी बहुरूपिये से गणतंत्र दिवस के अवसर पर परेड स्थल पर कमंडल बम जगह जगह रखकर दहशत फैलाने के लिए सबसे उपयुक्त और सुरक्षित आदमी समझकर एकांत मे डील करने के लिए बात की।
आदमी-बाबा ! आपको केवल दस से पंद्रह जगहों पर कमंडल रखने है , बदले मे इतने पैसे मिलेंगे कि आपको रूप बदलकर भीख माँगने की जरूरत नहीं पङेगी ।
बाबा- (कुछ रूक कर) बेटा ! पेट के लिए गरीबी मे बहुरूपिया बन सकता हं , भीख नहीं मिलने पर भूखे मर सकता हू , भिखारी , निक्कमे का ताना सुन सकता हू , पर जीते जी देशद्रोही नहीं बन सकता ।

मौलिक और अप्रकाशित
शुभ्रा शर्मा 'शुभ'

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Comment by Shubhranshu Pandey on January 31, 2014 at 1:18pm

आदरणीया शुभ्रा जी, सुन्दर कथा. देश भक्ति की भावना को हर व्यक्ति में दिखाने की सुन्दर कोशिश की गयी.

कथा के कसावट पर सुधीजन अपने विचार रखेंगे.

सादर.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 28, 2014 at 3:03pm

शुभ्राजी ..क्या जज्वा है ..यह देश यूं ही सलामत नही है ..देश प्रेम से बढ़कर कोई प्रेम नहीं ..अत्यंत सार्थक अभिव्यक्ति ..सार्थक कथा के लिए तहे दिल बधायी कवूल करें ..सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 28, 2014 at 1:12pm

बहुत सुन्दर सार्थक कथ्य लघु-कथा का प्रिय शुभ्रा जी,

दूसरी पंक्ति में व्याकरणिक त्रुटी है..आप पुनः देख लीजिये साथ ही वार्तालाप को इनवर्टेड कोमाज़ में लिखें, तो कहा स्पष्ट होगा..

इस सद्प्रयास के लिए हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Saarthi Baidyanath on January 28, 2014 at 11:04am

बहुत ही बढ़िया ...सार्थक कथा !

Comment by बृजेश नीरज on January 27, 2014 at 10:41pm

अच्छी है! आपको हार्दिक बधाई!

दूसरी पंक्ति में व्याकरण दोष है!

सादर!

Comment by Meena Pathak on January 27, 2014 at 5:31pm

बहुत सुन्दर .... अनुपम 

Comment by shubhra sharma on January 26, 2014 at 1:02pm
आदरणीय अखिलेश जी , आपके अभिव्यक्ति हेतु बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 26, 2014 at 12:14pm

सच्चे देश भक्ति की भावना अभाव और गरीबी में जी रहे व्यक्तियों में ही बची है । जो ज्यादा पढ़ा लिखा है वह वह उतना ही अंग्रेजी परस्त हो गया है,  देश को लूटने खसोटने में लगा है। लेकिन आश्चर्य यह कि ऐसे  लोग ही  इस देश में न सिर्फ राज कर रहे हैं बल्कि करोड़पति ,अरबपति, और खरबपति भी  यही लोग हैं। इन्हीं के कारण देश का यह हाल है॥

सुंदर लघु कथा की हार्दिक  बधाई आदरणीया  शुभ्रा शर्माजी॥

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