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व्यर्थ प्रपंचन छोड़कर,मीठी वाणी बोल! 
कर तू खुद ही न्याय अब,अंतर के पट खोल !!

धुआँ धुआँ चहुँ ओर है,घिरी अँधेरी रात !
जुगनूँ फिर भी कर रहा,उजियारे की बात !!

लोगों को क्या हो गया,करते उल्टी बात !
कहें रात को दिवस अब ,और दिवस को रात !!

शब्दों के सामर्थ्य का, ऐसा हो अध्याय।
चले लेखनी आपकी, लिखे न्याय ही न्याय॥

नीति नियम दिखते नहीं ,भ्रष्ट हुए सब तंत्र !
जिसे देखिये रट रहा ,लोलुपता का मंत्र !!

जानबूझकर क्यों मनुज ,करते हो तुम भूल !
चुभने वाली हैं यही ,तुमको बनकर शूल !!
********************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"

मौलिक /अप्रकाशित

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Comment by annapurna bajpai on November 28, 2013 at 8:38pm

सुंदर दोहवली ! बहुत बधाई आपको । 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 28, 2013 at 7:58pm

धुआँ धुआँ चहुँ ओर है,घिरी अँधेरी रात !
जुगनूँ फिर भी कर रहा,उजियारे की बात !! बहुत ही सुन्दर दोहा आदरणीय राम भाई

बाकी गुरुजन कह चुके हैं ...........सादर बधाई

Comment by बृजेश नीरज on November 28, 2013 at 7:22pm

आदरणीय राम भाई, बहुत ही सुन्दर दोहे हैं. आपको हार्दिक बधाई!

पांचवें दोहे में 'नीति' की जगह 'निति' क्यों लिखा स्पष्ट नहीं हो रहा.

तीसरे चरण में 'देखते' सही नहीं लगता. मेरे हिसाब से 'देखिये' होना चाहिए 

वैसे आप स्वयं समझदार हैं.

सादर!

Comment by राजेश 'मृदु' on November 28, 2013 at 4:11pm

जय हो, लगे रहें, आपकी दोहावली धीरे-धीरे धुल रही है

Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2013 at 10:53am

बहुत बहुत आभार आदरणीय लक्षमण जी। । सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 28, 2013 at 10:29am

सुंदर सीख देते दोहों के लिए बधाई श्री राम भाई -

फैशन में है आजकल, करना उलटी बात, 

कहते दिन को रात अब,कैसे सुखद प्रभात 

Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2013 at 12:37am

बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ जी आपके इन अमूल्य सुझावों का मै ह्रदय से स्वागत करता हूँ,  … ऐसे  ही मार्गदर्शन करते रहे आदरणीय। । सादर प्रणाम    

Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2013 at 12:36am

बहुत बहुत आभार आदरणीय गिरिराज  जी ,,,,,सादर 

Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2013 at 12:35am

बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई रमेश  जी ,,,,,सादर 

Comment by ram shiromani pathak on November 28, 2013 at 12:34am

बहुत बहुत आभार आदरणीय गोपाल   जी ,,,,,सादर 

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