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गुनगुनाती मध्यम धूप सुबह की, 

तन -मन मैं बिखेर देती है अनगिनित उजाले'

कहीं खो जाते है इस स्वर्णिम चमक में,

मन में छुपे कुछ बादल काले

 

खिल जाती हैं, नयी उमीदों की नयी कोपलें

नई धुन पर तैयार ,नई गुनगुनाहटे,  

  पहले से जवान, पहले से हसीन, 

  मन के कोने से निकलकर कहीं,                           

कोरे कैनवास पर बिखरने  लगती है, इन्द्रधनुषी घटाएं

 

आतुर हो उठते है हम, कर्मरत होकर,

पूर्ण करने को कुछ अपूर्ण आकांछाएं ,

  कुछ दिवास्वप्न, कुछ अदम्य अभिलाषाएं,

सुबह के जादू में झिलमिलाती. "नयी आशाएं'

 

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Comment

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Comment by anupama shrivastava[anu shri] on January 18, 2011 at 1:07pm
bahut dhanyavad veerendra ji.........swagat hai apka.
Comment by anupama shrivastava[anu shri] on January 18, 2011 at 1:04pm
bahut dhanyavad..........ganesh ji........swagat hai apka.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 16, 2011 at 4:00pm

कुछ दिवास्वप्न, कुछ अदम्य अभिलाषाएं, सुबह के जादू में झिलमिलाती. "नयी आशाएं

सत्य और सटीक अभिव्यक्ति , सुबह की बेला नई ऊर्जा का संचार और कुछ करने की उत्सुकता , सुंदर भाव है अनु श्री जी , बधाई इस कृत पर |

Comment by Veerendra Jain on January 15, 2011 at 12:48pm
Bahut hi khubsurat kavita hai ...Anu Shri... bahut bahut badhai aapko...
Comment by anupama shrivastava[anu shri] on January 15, 2011 at 12:37pm
bahut dhanyavad .'tahir ji'...welcome
Comment by विवेक मिश्र on January 14, 2011 at 6:47pm
प्रातःकाल का समय काफी ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है. इस सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकारें. 

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