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एक ग़ज़ल - चाँद सूरज गुलाब रक्खा है !!

एक ग़ज़ल - चाँद सूरज गुलाब रक्खा है !!
(२१२२ १२१२ २२/११२)

चाँद सूरज गुलाब रक्खा है |
ख़त में ख़त का जवाब रक्खा है ||

सिसकियों में कटी जो रात उसका
कागज़ों पर हिसाब रक्खा है ||

शामियाना तेरी मुहब्बत का
एक ऐसा भी ख़्वाब रक्खा है ||

लफ़्ज करते नहीं शिकायत क्या
खामुशी का नकाब रक्खा है ||

याद करना तुम्हें ख़ुदा की तरह
आदतों को ख़राब रक्खा है ||

ओढ़ रक्खी हैं झुर्रियाँ मैंने
और तुमने शबाब रक्खा है ||

सींचना चाहता हूँ रिश्तों को
खुद को प्यासा, जनाब रक्खा है ||

-- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on October 6, 2013 at 2:58pm

आदरणीय आशीष भाई एक बेहतरीन ग़ज़ल लाजवाब अशआर हुए हैं खास कर इन अशआरों हेतु विशेष तौर से बधाई स्वीकारें.

याद करना तुम्हें ख़ुदा की तरह
आदतों को ख़राब रक्खा है || वाह भाई वाह

सींचना चाहता हूँ रिश्तों को
खुद को प्यासा, जनाब रक्खा है || लाजवाब

Comment by Saarthi Baidyanath on October 6, 2013 at 2:28pm

जनाब ...मतले के लिए हार्दिक बधाइयाँ ...सचमुच दिल को छू गई ..

चाँद सूरज गुलाब रक्खा है |
ख़त में ख़त का जवाब रक्खा है ||.... शानदार आगाज़ ..आपने जल्दबाजी कर दी है शायद , उम्दा ग़ज़ल हो सकती है  ! :)

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 6, 2013 at 2:01pm

तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय रविकर जी !

तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय Er. Ganesh Jee "Bagi" जी !

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 6, 2013 at 1:58pm

शुक्रिया आदरणीया vandana जी !

शुक्रिया आदरणीय Abhinav Arun जी !!

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 6, 2013 at 1:51pm

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय hemant sharma जी, आदरणीय Sushil.Joshi जी ! 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 6, 2013 at 9:54am

अच्छी ग़ज़ल हुई है, 

//याद करना तुम्हें ख़ुदा की तरह 
आदतों को ख़राब रक्खा है ||//

इस शेर पर विशेष बधाई । 

Comment by रविकर on October 6, 2013 at 8:48am

बढ़िया-
आभार आदरणीय-

Comment by Abhinav Arun on October 6, 2013 at 7:07am

अच्छे शेर ..खूबसूरत ग़ज़ल हुई है ..हार्दिक बधाई श्री सलिल जी !!

Comment by vandana on October 6, 2013 at 6:43am

बहुत शानदार गज़ल आदरणीय आशीष जी 

Comment by Sushil.Joshi on October 6, 2013 at 2:43am

क्या शानदार गज़ल कही है आदरणीय आशीष भाई....बधाई हो...

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