For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आशीष नैथानी 'सलिल''s Blog (18)

कविता का आगमन

 दूर किसी स्टेशन से

शहर के ट्रैफिक को चीरते हुए

फुटपाथ पर उनींदे पड़े बच्चे का स्पर्श लिए

चौथे माले पर बेरोजगारों के कमरे तक

तुम्हारा आना

 

उन उखड़ी सड़कों से होते हुए

जहाँ की धूल विकास के नारों पर मुस्कुराती है,

बस की पिछली सीढ़ियों से लटकते हुए

बेटिकट पहुँचना मेरे गाँव

और मुझे छज्जे के कोने पर बैठा देख

यक-ब-यक मुस्कुराना  

 

तुम्हारा आना

छिपकली की तरह दीवार पर

आँधियों की तरह…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 6, 2014 at 11:34pm — 2 Comments

ग़ज़ल !!

इधर-उधर की न कर, बात दिल की कर साक़ी

सुहानी रात हुआ करती मुख़्तसर साक़ी ||

खिला-खिला है हर इक फूल दिल के सहरा में

तुम्हारे इश्क़ का कुछ यूँ हुआ असर साक़ी ||

अजीब दर्दे-मुहब्बत है ये शकर जैसा

जले-बुझे जो सितारों सा रातभर साक़ी ||

उतार फेंक हया शर्म के सभी गहने

कि रिस न जाए ये शब, हो न फिर सहर साक़ी ||

है बरकरार तेरा लम्स* मेरे होंठों पर

कि जैसे ओंस की इक बूँद फूल पर साक़ी ||

ख़ुदा से और न दरख़ास्त एक…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 30, 2014 at 11:00pm — 21 Comments

अभिलाषा - कविता !!

देवदार के पत्ते पर 

बर्फ के कतरे जितनी

मेरी अभिलाषा |

उस पर भी दुनिया की सौ-सौ शर्तें

सौ-सौ पहरे

तीक्ष्ण-तल्ख भाषा |

पलकों की ड्योढ़ी पर बैठे स्वप्न

कुछ नेपथ्य में टूट-फूट

करते विलाप

सभी प्रतीक्षारत, कब छँटे

घना कुहासा |

प्रस्वेदित तन

म्लानता का प्रचण्ड सूरज

जीवन नभ पर

और सिद्धि की

शून्य सदृश आशा |

भिक्षुक द्वार खड़ा आशीष लिए

दानी परदे में बैठा

यहाँ कौन भिक्षुक…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 13, 2014 at 12:51am — 8 Comments

ग़ज़ल - आप नाटक में नया किरदार लेकर आ गये !!

पीड़ितों के बीच से तलवार लेकर आ गये 

आप नाटक में नया किरदार लेकर आ गये |

मैं समझता था हर इक शै है बहुत सस्ती यहाँ

एक दिन बाबा मुझे बाज़ार लेकर आ गये |

माँ के हाथों की बनी स्वेटर थमाई हाथ में

आप बच्चे के लिए संसार लेकर आ गये |

क़त्ल, चोरी, घूसखोरी, खुदखुशी बस, और क्या

फिर वही मनहूस सा अख़बार लेकर आ गये |

दोस्तों से अब नहीं होती हैं बातें राज़ की

चन्द लम्हे बीच में दीवार लेकर आ गये |

--…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on December 26, 2013 at 8:31pm — 14 Comments

एक ग़ज़ल !!

(२१२२ १२१२ २२)

एक बीमार की दवा जैसे
तुम मेरे पास हो ख़ुदा जैसे |

साँस-दर-साँस ज़िन्दगी का सफ़र
और तुम आखिरी हवा जैसे |

उनकी आँखों में बस मेरा चेहरा
आइनों से हो सामना जैसे |

रूह ! बेकार है बदन तुझ बिन
इक लिफ़ाफ़ा है बिन पता जैसे |

आपकी मुस्कुराहटों की कसम
हो गया जन्म दूसरा जैसे |

- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक और अप्रकाशित)

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on December 3, 2013 at 11:30pm — 21 Comments

एक ग़ज़ल - चाँद सूरज गुलाब रक्खा है !!

एक ग़ज़ल - चाँद सूरज गुलाब रक्खा है !!

(२१२२ १२१२ २२/११२)

चाँद सूरज गुलाब रक्खा है |

ख़त में ख़त का जवाब रक्खा है ||

सिसकियों में कटी जो रात उसका

कागज़ों पर हिसाब रक्खा है ||

शामियाना तेरी मुहब्बत का

एक ऐसा भी ख़्वाब रक्खा है ||

लफ़्ज करते नहीं शिकायत क्या

खामुशी का नकाब रक्खा है ||

याद करना तुम्हें ख़ुदा की तरह

आदतों को ख़राब रक्खा है ||

ओढ़ रक्खी हैं झुर्रियाँ मैंने

और…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on October 5, 2013 at 8:05pm — 36 Comments

ग़ज़ल - इतनी आसाँ ज़िंदगी होगी नहीं !

(मात्रिक विन्यास -- २१२२ २१२२ २१२ )


इतनी आसाँ ज़िंदगी होगी नहीं
मुश्किलों से दोस्ती होगी नहीं |

दर्द से कागज़ पे करना रौशनी
हर किसी से शाइरी होगी नहीं |

रुक न पाया सिलसिला जो बाँध का
कल के दिन भागीरथी होगी नहीं |

इस तरह कुचला गया जो हर गुलाब
फिर किसी घर में कली होगी नहीं |

मुद्दतों के बाद याद आया कोई
मेरे घर अब तीरगी होगी नहीं |


- आशीष नैथानी 'सलिल'
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 25, 2013 at 7:00pm — 24 Comments

ग़ज़ल - एक और प्रयास !

( २१२२ २१२२ २१२ )



क्या हुआ कोशिश अगर ज़ाया गई

दोस्ती हमको निभानी आ गई |



बाँधकर रखता भला कैसे उसे

आज पिंजर तोड़कर चिड़िया गई |



चूड़ियों की खनखनाहट थी सुबह

शाम को लौटी तो घर तन्हा गई |



लहलहाते खेत थे कल तक यहाँ

आज माटी गाँव की पथरा गई |



कैस तुमको फ़ख्र हो माशूक पर

पत्थरों के बीच फिर लैला गई |



आज फिर आँखों में सूखा है 'सलिल'

जिंदगी फिर से तुम्हें झुठला गई |



-- आशीष नैथानी 'सलिल'…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on August 5, 2013 at 8:00pm — 16 Comments

ग़ज़ल - प्यार की बातें करें !!!

(२१२२, २१२२,२१२२,२१२)



नफरतों की बात छोड़ें, प्यार की बातें करें

दुश्मनों को रहने दें, दिलदार की बातें करें ।



तोड़ दें हथियार सारे, फेंक दें तलवार भी

क्या बुरा जो हम कलम की धार की बातें करें ।



'गोधरा' के भूत को फिर याद कर होगा भी क्या

ईद-होली और कुछ त्यौहार की बातें करें ।



है सियासत, खेल-कारोबार है, सब कुछ तो है

मेज पर रक्खे हुए अखबार की बातें करें ।



गाँव कस्बे और फिर इस शहर की बातें हुई

आज छत पर बैठकर संसार की बातें करें…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on July 18, 2013 at 1:10am — 15 Comments

दीवारों पर लकीरें !!!

गाँव के कच्चे घरों में…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 28, 2013 at 11:26am — 22 Comments

ग़ज़ल - तिश्नगी कर दी !!!

दर्द में आपने कमी कर दी
अपनी यादें जो अजनबी कर दी ।
 
 
आँख भर इश्क का समंदर था
रूठकर कैसी तिश्नगी कर दी ।
 
 
मामला घर में ही सुलझ जाता
बात छोटी सी थी, बड़ी कर दी ।
 
 
फैसला जब दिया तो मक़्तल में
जान आफ़त में थी, बरी कर दी ।
 
 
और क्या देंगे मुफलिसी में तुम्हें
नाम तेरे ये जिंदगी कर…
Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on April 5, 2013 at 11:55pm — 21 Comments

एक गज़ल - क्या कहें !!!

शाम को नजरें मिली यूँ, क्या कहें

आस की उपजी कली यूँ, क्या कहें



बात आँखों से चली यूँ, क्या कहें

खिल उठी मन की गली यूँ, क्या कहें



रूह से गोरी-सलोनी सी लगी

देह से वो साँवली यूँ, क्या कहें



धूप उस पर जुल्म करना छोड़ दे

जो है मक्खन की डली यूँ, क्या कहें



मिल भी जाते गर कदम तकदीर में

पर हमारी कुण्डली यूँ, क्या कहें



वो रियासत…
Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 14, 2013 at 11:28pm — 12 Comments

हैदराबाद से - एक ग़ज़ल !!!

आँख जैसे लगी, ख़ाक घर हो गया

जुल्म का प्रेत कितना निडर हो गया ।



कुछ दरिन्दों ने ऐसी मचाई गदर

खौफ की जद में मेरा नगर हो गया ।



थी किसी की दुकाँ या किसी का महल

चन्द लम्हों में जो खण्डहर हो गया ।



है नजर में महज खून ही खून बस

आज श्मसान 'दिलसुखनगर' हो गया ।



थी ख़बर साजिशों की मगर, बेखबर !

ये रवैया बड़ा अब लचर हो गया ।



कौन सहलाये बच्चे का सर तब 'सलिल'

जब भरोसा बड़ा मुख़्तसर हो गया ।



------  आशीष 'सलिल'…

Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 22, 2013 at 10:00pm — 24 Comments

ग़ज़ल - हम तलक ही रहे !!!

राज की बात हम तलक ही रहे
ये मुलाक़ात हम तलक ही रहे ।

कुछ सवालात पूछ बैठे हम
कुछ सवालात हम तलक ही रहे ।

उनके इल्ज़ाम सब थे झूठे मगर
मेरे इस्बात हम तलक ही रहे ।

डर है तुझको बहा न ले जाये
ऐसी बरसात हम तलक ही रहे ।

इन सितारों को बाँट ले दुनिया
चाँदनी रात हम तलक ही रहे ।

(इस्बात - प्रमाण/सुबूत)

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on February 17, 2013 at 11:31pm — 33 Comments

गजल -- अच्छी नहीं लगती !!!

ख़ता करके मुकर जाने की लत अच्छी नहीं लगती,

हमें इन लोगों की यारी, कोई यारी नहीं लगती ।



सियासत कर रहे हैं जो गरीबों का लहू पीकर,

उन्हें फिर से जिताने में, समझदारी नहीं लगती ।



मेरी आँखें तेरे दर पर हैं ठुकराई गयी, तब से

किसी की आँख की बूँदें, हमें मोती नहीं लगती।



करीने से सज़ाकर थे रखे कुछ काँच के टुकड़े,

मगर अब काँच…
Continue

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 20, 2013 at 3:06pm — 11 Comments

गजल - कशाकश !!!

समय के इस कशाकश में, बदलना सीख जायेंगे
गिरेंगे फिर उठेंगे, खुद ही चलना सीख जायेंगे ।

नदी नालों ने ली है जान कुछ लाचार धारों की
करो मजबूत पैरों को, ये पलना सीख जायेंगे ।

कटे पंखों से उडती है जिगर वाली वो गौरेया,
नये मौसम में पर फिर से निकलना सीख जायेंगे ।

नहीं पहचानते बच्चे अभी तक लाल अंगारा,
हथेली पर रखेंगे तो ये जलना सीख जायेंगे ।

'सलिल' छोड़ो ये वैशाखी चलो थामो कलम-कागज,
सियासत डगमगायेगी, बदलना सीख जायेंगे ।

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 13, 2013 at 3:26pm — 10 Comments

गजल -- हो रहा है फिर उजाला इस शहर में !!!

हो रहा है फिर उजाला इस शहर में,
जल उठी है मोमबत्ती मेरे घर में ।

आँधियों के पैर कतराने लगे हैं,
है समंदर आस का अब हर नजर में ।

देखकर कोंपल नयी खुश हो गये हम,
शेष है आशा घनी बूढ़े शजर में ।

शाम से महसूस होती है थकावट,
लौट आती है जवानी, नव सहर में ।

यूँ मिला किरदार जीवन का 'सलिल' को,
गीत गम का गुनगुनाया भी बहर में ।

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 11, 2013 at 6:32pm — 8 Comments

" खुशकर "

जिस तरह दिनकर चमकता
व्योम में,
अलविदा कहता निशा को,
बादलों के झुण्ड को
पीछे धकेले ।

काश होता एक सूरज
ख़ुशी का भी ।

कोई तापता धूप सुबह की,
कोई बिस्तर डाल देता दोपहर के घाम में ।
खुशनुमा गरमी भी होती
कम व ज्यादा,
पूष से ज्येष्ठ तक ।
और पसीना भी निकलता,
इत्र सा ।

काश कल्पा हो उठे साकार,
एक 'खुशकर' हो भी जाये
दिवाकर सा ।।

Added by आशीष नैथानी 'सलिल' on January 8, 2013 at 7:30pm — 6 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आजकल इस देश में-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें। समझाइश जनाब समर कबीर…"
7 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Md. Anis arman's blog post नज़्म
"बहुत ख़ूब! जनाब अनीस अरमान साहिब आदाब, उम्दा नज़्म कही आपने, मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मतले पर जनाब…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-है कहाँ
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है बधाई स्वीकार करें। 2122 - 2122 - 2122 -…"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आदरणीय धर्मेंद्र कुमार यादव जी आदाब, सुंदर गीत लयबद्ध किया है आपने, बहुत बहुत बधाई स्वीकार…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post सावन के दोहे : ..........
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन ।सावन पर अच्छे दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन ।अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई । सुधीजनों की टिप्पणी का…"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on TEJ VEER SINGH's blog post आत्म घाती लोग - लघुकथा -
"आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । सुंदर समसामयिक कथा हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
11 hours ago
Chetan Prakash and Manan Kumar singh are now friends
14 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav posted a blog post

एक सजनिया चली अकेली

संग न कोई सखी सहेली, रूप छुपाए लाजन से। एक सजनिया चली अकेली, मिलने अपने साजन से।मधुर मिलन की आस…See More
15 hours ago
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल-है कहाँ

2122 2122 2122 2121उनकी आँखों में उतर कर ख़ुद को देखा है कहाँहक़ अभी तक उनके दिल पर इतना अपना है…See More
16 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हमने तो देखा बीज न खेतों में डालकर -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"ओ के, जनाब, मुसाफ़िर, आपकी ग़ज़ल आपकी नज़र, आदाब  ! "
19 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service