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!!! पाठशाला बेमुरव्वत !!!

लोग मन को जांचते हैं,
भांप कर फिर काटते हैं।।

जब किसी का हाथ पकड़ें,
बेबसी तक थामते हैं।

धूप में बरसात में भी,
छांव-छतरी झांकते हैं।

दोस्तों से दुश्मनी जब,
रास्ते ही डांटते हैं।

छोड़ते हैं दर्द विषधर
बालिका को साधते हैं।

आज गरिमा मर चुकी जब,
गीत - कविता भांपते हैं।

जिंदगी में शोर बढ़ता
रिश्ते सारे सालते हैं।

पाठशाला बेमुरव्वत,
प्राण अस्मत चाहते हैं।

मैं सुनाऊं आप सुन लें
मौन दीपक कांपते हैं।

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 13, 2013 at 6:21pm

आ0 बृजेश भाई जी,  सादर प्रणाम! भाई जी, आप पाठक हैं या समीक्षक यह बात मेरे समझ में नहीं आयी।  भाई! मेरी भाषा और शैली अनूठी है, जो कभी भी किसी से मेल नहीं खाएगी।  क्यों कि मैं अपनी  बात लिखता हूं।  आपकी स्पष्टता और समझ को इस तालमेल में मत मिलाइए।  आपके स्नेह के लिए आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 13, 2013 at 6:11pm

आ0 विजय भाई जी,  सादर प्रणाम! आपके स्नेह और सराहना के लिए आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 1:04pm

आदरणीय केवल भाई बहुत सुन्दर! आपको हार्दिक बधाई!
एक निवेदन कि कहन में ऐसी स्पष्टता अवश्य होनी चाहिए कि पाठक को झट समझ आ जाए। यह मेरी समझ भर है। हो सकता है कि आप कि इस विषय पर आपकी राय अलग हो।
सादर!

Comment by विजय मिश्र on September 13, 2013 at 12:23pm
भाई केवलजी , आपकी कविता के शब्द-शब्द मन को काटते हैं , विषय सधा हुआ और व्यथित करती अभिव्यक्ति , समयोचित संदर्भ . बधाई .
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:09pm

आ0 अरविन्द भाई जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:08pm

आ0 भण्डारी भाई जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:07pm

आ0 महिमा श्री जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:06pm

आ0 राम शिरोमणि भाई जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:05pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी, आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 12, 2013 at 6:02pm

आ0 अनिल भाई जी, आपका बहुत-बहुत आभार।  सादर,

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