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आज मैं सर को झुकाने आया हूँ

पुष्प भावों के चढाने आया 

आज मैं सर को झुकाने आया 

बस रही है आप की ही तो कृपा 

बात ये दिल की जताने आया 

कर्ज में डूबा है कतरा कतरा 

कर्ज किंचित वो चुकाने आया 

एक रिश्ता है गुरु चेले में 

आज वो रिश्ता निभाने आया 

ज्ञान दाता हो बिधाता सम  तुम 

दीप दिल का मैं जलाने आया 

ज्ञान रग रग में समाहित जिनका 

उनको कुछ दिल की सुनाने आया 

जग में  महती है जो रिश्ता सबसे 

आशु वो रिश्ता बताने आया 

डॉ आशुतोष मिश्र \

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 688

Comment

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 7, 2013 at 4:05pm

आदेर्नीय प्राची जी जौसला आफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 3:03pm

सुन्दर भावों कि प्रस्तुत किया है डॉ० आशुतोष जी 

हार्दिक शुभकामनाएँ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 5, 2013 at 10:45am

आदरनीय ब्रिजेश जी आदरनीय गिरिराज जी ..आप सभी के निरंतर प्रोत्साहन ही मुझे सतत लिखने का हौसला देता है 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 5, 2013 at 10:26am

आदरनीय जीतेन्द्र जी ..आपका सतत प्रोत्साहन मुझे रचना धर्मिता के लिए प्रेरित करता है शिक्षक दिवस पर हार्दिक बधाई 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 5, 2013 at 10:24am

आदरनीय सुरेन्द्र जी ..बस यूं ही अपना स्नेह बनाये रखें ..शिक्षक दिवस पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 5, 2013 at 10:22am

आदेर्नीय मीना जी , अनुपमा जी ..आपके शब्द मुझे सतत कुछ लिखने की प्रेना देते हैं ..शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 5, 2013 at 10:20am

राम शिरोमणि जी .हौसला अफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 5, 2013 at 6:48am

आदरणीय आशुतोष भाई , बहुत सुन्दर , बहुत भाव पूर्ण रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!

Comment by बृजेश नीरज on September 5, 2013 at 6:32am

वाह! बहुत खूब! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 5, 2013 at 3:34am

ज्ञान दाता हो बिधाता सम  तुम 

दीप दिल का मैं जलाने आया .......यह पंक्ति बहुत पसंद आई

सुंदर रचना पर बधाई आदरणीय डा. आशुतोष जी

कृपया ध्यान दे...

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