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ग़ज़ल : याद है तुझको

2122 2122 2122 2122

शेर मेरे  ये  सभी यूं तो ज़माने के लिए हैं।
बेवफा से भी मुहब्बत ही जताने के लिए हैं।।

याद है तुझको कभी तू भी रहा है साथ मेरे।
याद भी तेरी जहां में भूल जाने के लिए हैं।।

चाहता है दर्द उसके सब मिटे दुनिया से कमसिन।
दर्द भी कुछ सीने पर ही तो लगाने के लिए हैं।।

दिल उन्होंने यूं संभाला जैसे कोई आइना हो।
आइना तो यार सब ही टूट जाने के लिए हैं।।

जख्म मेरे जो भी दुनिया से मिले है प्यार में वो।
जख्म ये सब यार उनसे ही छुपाने के लिए हैं।।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Ketan Parmar on September 2, 2013 at 2:32pm

Sabhi Mitro ka sukriyaa like or comment karne ke liye

Comment by Ketan Parmar on September 2, 2013 at 2:31pm

Adarniyaa Rajesh Kumari ji

Kripya detail me samajhaye mujhe aapki baat kuch samajh nayi aayi hai saadar

Comment by Ketan Parmar on September 2, 2013 at 2:29pm

Vivek ji sahi kaha hai unki ghazal padhne ke baad ye koshish ki hai maine

Comment by वीनस केसरी on September 2, 2013 at 3:55am

अच्छी ग़ज़ल हुई है ,,, सीखने की राह में एक और कदम
टिप्पणी में आई इस्लाह की ओर ध्यान दें तो दोष सुधार हो जायेगा
सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 1, 2013 at 12:32pm

प्रयास अच्छा है इस हेतु बधाई स्वीकारें मैं भी आदरणीया राजेश कुमारी जी से पूर्णतया सहमत हूँ भाई उनके कहे का सज्ञान करें.

Comment by vandana on September 1, 2013 at 6:34am

बहुत बढ़िया ग़ज़ल 

Comment by vijayashree on September 1, 2013 at 12:14am

दिल उन्होंने यूं संभाला जैसे कोई आइना हो।
आइना तो यार सब ही टूट जाने के लिए है।।

बहुत खूब 

दाद कबूल कीजिये केतन परमार जी 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 31, 2013 at 8:14pm

आदरनीय केतन जी 

जख्म मेरे जो भी दुनिया से मिले है प्यार में वो। 
जख्म ये सब यार उनसे ही छुपाने के लिए है।।..इस बेहतरीन ग़ज़ल का ये शेर मुझे बेहद पसंद आया ..आपको ढेरों बधाई 

Comment by shubhra sharma on August 31, 2013 at 7:03pm

आदरणीय केतन जी
जख्म मेरे जो भी दुनिया से मिले है प्यार में वो।
जख्म ये सब यार उनसे ही छुपाने के लिए है।।
...............बहुत खूब ,बहुत बहुत बधाई

Comment by Shyam Narain Verma on August 31, 2013 at 12:48pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………

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