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vijayashree
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kanpur ,u.p.
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jaipur,rajasthan

माँ का दर्द

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At 1:00am on October 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:30pm on September 11, 2013, अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव said…

 विजयाश्री जी - राधे-राधे ॥ त्योहारो पर ....  को आपने पसंद किया और उस पर उत्साह वर्धक             टिप्पणी की इसके लिए हार्दिक धन्यवाद ।

At 2:05pm on September 10, 2013, ARVIND BHATNAGAR said…
Bahut dhanyavad Vijayshree ji.....
At 11:27pm on April 7, 2013, vijayashree said…
Thanx seemaji
At 11:57pm on April 5, 2013, seema agrawal said…

विजयाश्री जी आपका साथ मिला यहाँ ........मन प्रसन्न हो गया ...दिल से स्वागत है आपका ........आपकी सुन्दर रचनाओं से यह मंच और समृद्ध होगा ये मानना है मेरा ....शुभकामनाएं 

Vijayashree's Blog

मेरा मन

मेरा मन

ढूंढे क्या ....

 

सुख आनंद

ये तो है छलावा

मन का भ्रम

 

प्रसन्नता

ये तो आनी जानी

है क्षणिक

 

संतुष्टि

ये है मोहताज़

अभिलाषाओं की

 

धैर्य स्थिरता

है ये स्वयं की सोच

मस्तिष्क उपज

 

शांति

पर किन मूल्यों पर

अंतःकरण या बाह्य:करण 

 

पूर्णता का अहसास

ये तो है एक खामोशी

महसूस करने की

 

फिर भी

ढूंढता…

Continue

Posted on September 16, 2013 at 10:30pm — 13 Comments

नई सीख

इस नगर में

मेरे कुछ सपने

हुए साकार

और कुछ

बिखरे किरचियाँ बन

पर

इन सपनों की

फ़ेहरिस्त थी लम्बी

इन्हें पूरा करने

जी जान से थी जुटी

कभी

भावुकता में बही

तो कभी

व्यावहारिकता ओढ़ी

कहीं

करना पड़ा संघर्ष

इसके

विद्रोही मोड़ों पर

लेकिन

इस नगर की

एक बात है ख़ास

मुस्कुराहटों में इसने

दिया मेरा साथ

पर एक बात

है इसकी…

Continue

Posted on August 31, 2013 at 10:00pm — 12 Comments

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं

 

१.

माखन चोर

गिरधर गोपाला

नन्द का लाला

   

२.

राधा-औ-कृष्णा

गोपियों संग रास

बंसी ले हाथ

 

३.

सहज जियो

जीवन है उत्सव

कृष्ण सन्देश

४.

हँस के जियो

जिंदगी प्रेम रस

छक के पियो

 

५.

आनंददायी

कृष्णवृत्ति जो फ़ैले

दुनिया…

Continue

Posted on August 28, 2013 at 12:30pm — 9 Comments

औरत

 

    औरत

 

मैंने  

औरत बन जन्म लिया

हाँ मैं हूँ

एक औरत 

और औरत ही

बनी रहना चाहती हूँ

क्यूंकि

मैं इक बेटी हूँ

मैं इक बहन हूँ

मैं इक पत्नी हूँ

सर्वोपरि इक माँ हूँ

मैं इक पूरी कौम हूँ

 

एवं

इनसे जुडे हर रिश्ते

की बिन्दू हूँ मैं

वो सभी घूमते रहते हैं

मेरे चारों ओर

एक वृत्त की तरह

 

और मैं

चाहे…

Continue

Posted on July 19, 2013 at 10:32pm — 15 Comments

 
 
 

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