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लिख दिया तो लिख दिया

हमने तुम्हारी जात पर,जब लिख दिया तो लिख दिया

कुछ बेतुके जज्बात पर;जब लिख दिया तो लिख दिया

 

कितना सुहाना मुल्क है, तुमने कहा अखबार में

बीमार से हालात पर जब लिख दिया तो लिख दिया   

 

जब से खुले बाजार की रख्खी गयी है नींव तो  

हरदिन लगे आघात पर जब लिख दिया तो लिख दिया

 

नक्कारखाना बन गया, सुनता नहीं, कोई कहीं

दिन-रात के उत्पात पर जब लिख दिया तो लिख दिया

 

कश्ती भंवर में है परेशां, नाखुदा कोई नहीं

फिर गर्दिशे हालात पर जब लिख दिया तो लिख दिया

 

यह देश सारा जल रहा, बस घर तुम्हारे जश्न है   

ऐसे ही तहकीकात पर जब लिख दिया तो लिख दिया

 

चुपचाप कितने रोज तक, हम भी दबाते यूँ कहो

हर बात की औकात पर, जब लिख दिया तो लिख दिया

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2013 at 10:53pm

वाह ..  जब लिख दिया तो लख दिया !

दाद कुबूल करें

Comment by राज़ नवादवी on August 7, 2013 at 7:49pm

हमने तुम्हारी जात पर,जब लिख दिया तो लिख दिया

कुछ बेतुके जज्बात पर;जब लिख दिया तो लिख दिया

-मतला खासकर सुन्दर है! 

Comment by विजय मिश्र on August 7, 2013 at 12:20pm
ललितजी , कितनी तारीफ़ करूँ आपके इस हरफ दर हरफ जलते हुए गजल की ,समझ में नहीं आता ? वाकई -
इन जलते हुए हालात पर आपने बेहद दिलकसीस गजल लिख दिया ,
किसी की क्या मजाल कि काटदे इस मुद्दे पर आपने जो लिख दिया |

बहुत बहुत बधाई भाई ललितजी .

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on August 7, 2013 at 10:43am

आपकी इच्छानुसार रचना में वांछित सुधार कर दिया गया है आद० डॉ ललित कुमार सिंह जी.

Comment by seema agrawal on August 7, 2013 at 12:54am

वाह क्या शानदार ग़ज़ल कही है  ''पर जब लिख दिया तो लिखा दिया '' रदीफ़ बहुत ही रोचक 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on August 6, 2013 at 10:45pm

आदरणीय ललित कुमार सिंह जी, शानदार गज़ल के लिए दिली मुबारकबाद.......

Comment by Vasundhara pandey on August 6, 2013 at 9:01pm

बहुत सुन्दर लिखा आपने..शुभकामनाये !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on August 6, 2013 at 8:21pm

अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें डा ० साहब|

Comment by Ketan Parmar on August 6, 2013 at 8:07pm

aapki iss ghazal waah zazbat se jab likh diyaa to likh diyaa

umdaa ghazal

Comment by annapurna bajpai on August 6, 2013 at 7:43pm

आदरणीय डा० ललित जी बहुत बढ़िया लिख दिया आपने इस गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।

कृपया ध्यान दे...

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