For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कभी कभी

खामोश हो जाते हैं शब्द।

 

जीवन में

कब अपना चाहा होता है

सब।

 

बहुत कुछ अनचाहा

चलता है संग।

इस दीवार से

झरती पपड़ियाँ;

दरारों में उगते

सदाबहार और पीपल;

गमले में सूखता

आम्रपाली।

 

दिये की रोशनी सहेजने में

जल जाती हैं उंगलियाँ।

 

गाँठ खोलने की कोशिश में

ढूंढे नहीं मिलता

अमरबेल का सिरा।

 

तुम

किसी स्वप्न सी खड़ी

बस मुस्कुराती हो।

 

रेत के घरौंदे

बार बार ढह जाते हैं।

 

मैं बस निहारता रह जाता हूँ

मुँह बिराते अक्षरों को।

             - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 883

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on July 24, 2013 at 5:33pm

आदरणीय राम भाई यह सब आप लोगों की संगत का असर भर है। आपका हार्दिक आभार!

Comment by ram shiromani pathak on July 24, 2013 at 4:11pm

आदरणीय भाई ब्रिजेश जी आपकी पंक्ति //कभी कभी
खामोश हो जाते हैं शब्द। मै तो खामोश हो गया पढ़कर,और सोचने पर मज़बूर भाई कहाँ से ऐसे भाव और शब्द पा जाते है ///अनुपम //हार्दिक बधाई

Comment by बृजेश नीरज on July 23, 2013 at 8:22pm

आदरणीया अन्नपूर्णा बहन आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 23, 2013 at 8:20pm

आदरणीय लक्ष्मण जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 23, 2013 at 8:18pm

आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार! आपके शब्दों ने मुझे बल दिया।

Comment by annapurna bajpai on July 23, 2013 at 7:34pm

adarniy brejesh bhai ji , itni sudarta se piroye gaye har shabd ko kya kahun , bas nishabd hun .

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 23, 2013 at 7:16pm

बहुत खूब !सुन्दर शब्द भाव रचना के लिए हार्दिक बधाई भाई श्री बृजेश नीरज जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 23, 2013 at 5:42pm

आदरणीय बृजेश जी 

इतनी सुन्दर रचना..जैसे खामोश खड़े पाठक अपनी ही ज़िंदगी को सामने जी रहा हो..आपके शब्दों में 

हर भाव-शब्द नें रोक लिया , हर भाव बिम्ब नें मुग्ध किया

बहुत खूबसूरत.

हार्दिक बधाई 

Comment by बृजेश नीरज on July 23, 2013 at 5:18pm

आदरणीय सौरभ जी यह जो कुछ भी है, जो कुछ भी प्रयास कर पाता हूं, सब आपकी देन है। यह मेरी सच्चाई है। कोई भी रचना जब पोस्ट करता हूं तो यह जरूर सोचता हूं कि इस पर आप क्या सोचेंगे। आपकी जो भी टिप्पणी मुझे प्राप्त होती है वह मेरे लिए अमृत की बूंद की तरह होती है।
आपने मेरी कलम को राह दिखायी, मेरे शब्दों को दिशा दी, इसके लिए आपका हार्दिक आभार! आगे अपना आशीष मुझ पर यूं ही बनाए रखिएगा, यही आपसे प्रार्थना है।
आपको नमन!
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on July 23, 2013 at 5:10pm

आदरणीय शरदिंदु जी क्षमा। आगे से ध्यान रखूंगा।
सादर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
11 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
17 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
20 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service