For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मंद हवा की

लहरों पर बैठ

आकाश ने

हाथों में लिया

सितारों का अक्षत,

अरूणोदय का कुमकुम,

ओस की बूंदें,

बाग से

पुष्प, घास

और तिरोहित कर दी

रात

क्षितिज में।

              - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

Views: 798

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 5:03pm

आदरणीय निकोर साहब आपका हार्दिक आभार!

Comment by vijay nikore on July 12, 2013 at 5:02pm

 

अति सुन्दर रचना के लिए बधाई, आदरणीय।

विजय निकोर

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 4:42pm

आदरणीय राजेश जी इस उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार!

वास्तविकता देखें तो संक्रमित तो मैं हुआ हूं आपकी रचनाओं से।
आपका बहुत आभार!
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 4:39pm

आदरणीय लाडलीवाल जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 4:38pm

आदरणीय माथुर साहब आपका आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 4:36pm

आदरणीय सुमित जी आपका आभार!

Comment by बृजेश नीरज on July 12, 2013 at 4:30pm

आदरणीया प्राची जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार!  

Comment by राजेश 'मृदु' on July 12, 2013 at 3:17pm

ये तो गड़बड़ झाला है, आप ऐसे कल्‍पना नहीं कर सकते---- मैं तो अवाक् हूं कि आखिर कैसे आपने ऐसे सोच लिया । आपकी यह अभिव्‍यक्ति बड़ी संक्रामक हो सकती है, कम से कम इसने मुझे तो संक्रमित कर ही दिया । सुना था संत ध्‍यानस्‍थ होते हैं पर रचनाकार भी ध्‍यानस्‍थ हो सकते हैं यह प्रत्‍यक्ष देख रहा हूं । बहुत ही उन्‍नत भावों वाली अभिव्‍यक्ति है ये, सादर

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 12, 2013 at 1:43pm

प्रकृति का सुन्दर अहसास कर चित्रण करने हेतु सुन्दर शब्द संयोजन के लिए बधाई श्री ब्रिजेश नीरज जी 

क्षितिज तिरोहित हो न सकी 

जब जब क्षितिज को पकड़ने का यत्न किया 

क्षितिज हर बार दूर होता चला गया |

आँख खुली तो पता लगा 

खितिज़ को मैने अहसास किया 

देखा, पर क्षितिज का अस्तित्व 

नहीं मिला | - लक्ष्मण 

Comment by D P Mathur on July 12, 2013 at 11:30am

आदरणीय बृजेश जी सदा की भांति सुन्दर चित्रण !      

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
47 seconds ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
14 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
3 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
15 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
15 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
15 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
15 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday
Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
Sunday
Admin posted discussions
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service