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नींद गवांई,सुख चैन गवांया

जीवन की आपा -धापी में 

अगर-मगर तेरी-मेरी में

समय गवांया ,बातों में 

धन दौलत ने लोभी बनाया 

ईमान गवांया नोटों में 

पूत सपूत न बन पाया 

बस ध्यान लगाया माया में

दीन दुखियों की सेवा करता

पुण्य कमाता लाखों में 

करता अच्छे कर्म अगर तो 

तर जाता भाव सागर से

ईमान धर्म की राह पे चलकर

करता पग के कांटें दूर

वैतरणी भी पार कर जाता

जन्म-मरण से जाता छूट   

(मौलिक व अप्रकाशित)

आरती शर्मा 

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Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on August 11, 2016 at 10:58am

धर्म की राह सुख की राह 

Comment by Aarti Sharma on July 16, 2013 at 11:30am

आपका तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय विजय जी...सादर 

Comment by vijay nikore on July 13, 2013 at 10:53am

सत्य को अच्छा दर्शाया है, आदरणीया। बधाई।

सादर,

विजय निकोर

Comment by Aarti Sharma on July 11, 2013 at 8:56pm

आपका तहेदिल से शुक्रिया आदरणीय  Shijju S जी ..आभार

Comment by Aarti Sharma on July 11, 2013 at 8:53pm

रचना सराहने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद  आदरणीय राजेश जी,,अपनी कमियों को दूर करने क लिए प्रयत्नशील रहूंगी..आभार 

Comment by Aarti Sharma on July 11, 2013 at 8:50pm

आपके सराहनीय कमेंट से मेरा उत्साह और अधिक बड जाता है.अपना स्नेह एवं आशीर्वाद इसी तरह बनाये रखियेगा  ..आपका तहेदिल से धन्यवाद...आदरणीय लक्ष्मण सर..

Comment by Aarti Sharma on July 11, 2013 at 8:46pm

इस अमूल्य सुझाव के लिया आपका कोटि कोटि धन्यवाद प्रिय प्राची जी ..आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 11, 2013 at 6:58pm

आ० आरती शर्मा जी 

एक लंबे समय से आपकी रचनाओं की अंतर्धारा को देख रही हूँ... 

सात्विक सत्य बोध के बेहद करीब से गुजरती रचनाएँ होती हैं...पर अभिव्यक्ति प्रवाह और प्रस्तुतिकरण के लिहाज से बहुत कमज़ोर रह जाती हैं..

और रचनाएँ भी पढ़ें , स्वाध्याय ही कई बार अपेक्षित अवयवों को सुझाता है और रचनाकर्म को परिष्कृत करने का साधन भी बनता है.

इस प्रस्तुति पर सादर बधाई 

शुभेच्छाएँ

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 11, 2013 at 6:55pm

सुन्दर गीत रचना जो अंत में आदर्श भाव के साथ धर्म की राह समझाती समाप्त होती है | हार्दिक बधाई आदरणीय आरती शर्मा  जी 

Comment by राजेश 'मृदु' on July 11, 2013 at 4:32pm

किसी गीत की तरह लग रही है यह रचना पर कई जगह प्रवाह खटकता रहा, हो सकता है मैं इसे गीत की तरह पढ़ रहा हूं । आपके भाव अच्‍छे है, सादर

कृपया ध्यान दे...

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