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*** कुण्डलिया छन्द ***
==================
सच्चाई कॊ प्रॆम सॆ, कर लॊ तुम स्वीकार !
सदा दम्भ कॆ शीश पर, करतॆ रहॊ प्रहार !!
करतॆ रहॊ प्रहार, पनपनॆ कभी न पायॆ !
सुन्दर सहज विचार, सभी वॆदॊं नॆं गायॆ !!
कहॆं "राज"कविराज,करॊ जग मॆं अच्छाई !
नाम अमर हॊ जाय, निभायॆ जॊ सच्चाई !!१!!

ताना मारॆ तान कर, निन्दक मिलॆ पुनीत !
जीत गयॆ तॊ जीत है, हार गयॆ भी जीत !!
हार गयॆ भी जीत, भला अपना ही हॊता !
बिन साबुन औ नीर, चरित्र यही है धॊता !!
कहॆं "राज"कविराज,बड़ा ही बिकट ज़माना !
निन्दक रख लॊ पास, सदा मारॆ जॊ ताना !!२!!

फूला फला उजाड़ कर, रहा ठूँठ कॊ सींच !
सागर मुक्ता खॊजता, मूरख आँखॆं मींच !!
मूरख आँखॆं मींच, सिखाता तीर चलाना !
लाया घॊंघा खींच,कहॆ मिल गया खज़ाना !!
कहॆं"राज"कविराज, झुलायॆ सब कॊ झूला !
मॆढ़क सा टर्राय, दम्भ मॆं इतना फूला !!३!!

महँगाई मॊटी हुई, पतला हुआ पग़ार !
पति-पत्नी यॆ रात भर, करतॆ रहॆ विचार !!
करतॆ रहॆ विचार, चलॆ कैसॆ घर खर्चा !
उलट-पलट हर बार,रात भर जारी चर्चा !!
कहॆं "राज" कविराज,मुसीबत भारी आई !
सब्जी रही चिढ़ाय, बढ़ी इतनी महँगाई !!४!!

कवि-राज बुन्दॆली"
०६/०७/२०१३
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 736

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Comment by कवि - राज बुन्दॆली on August 7, 2013 at 12:56pm

बसंत नेमा जी,,, आपका बहुत बहुत आभार,,,,,रचना की कमियॊं की तरफ़ भी बताइयेगा,,,,,

Comment by बसंत नेमा on July 8, 2013 at 11:10am

बहुत ही सुन्दर रचना बधाई 

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on July 7, 2013 at 10:54pm

 AWAHAR LAL SINGH जी आपकॆ इस स्नॆह कॆ लियॆ दिल सॆ आभार,,,,,,,,,,

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 7, 2013 at 8:08pm

बहुत ही सुन्दर मनमोहक और शिक्षाप्रद भी ! बधाई !

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on July 7, 2013 at 5:58pm
Comment by कवि - राज बुन्दॆली on July 7, 2013 at 5:56pm

आदरणीया,,,, rajesh kumari जी,,, आपका बहुत बहुत आभार,,,,,रचना की कमियॊं की तरफ़ भी बताइयेगा,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on July 7, 2013 at 5:56pm

आदरणीय  ram shiromani pathak जी,,, आपका बहुत बहुत आभार,,,,,रचना की कमियॊं की तरफ़ भी बताइयेगा,,,,,

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on July 7, 2013 at 4:38pm

आदरणीय पंकज जी,,, आपकॆ स्नॆह को नमन,,,,,रचना की कमियॊं की तरफ़ भी बताइयेगा,,,,,

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 7, 2013 at 3:21pm
आदरणीय..राज जी, सुंदर रचना पर हार्दिक बधाई...

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 7, 2013 at 2:46pm

बहुत शानदार उत्कृष्ट कुंडलिया हैं राज बुन्देली जी बहुत बहुत बधाई 

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