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आल्हा छंद - प्रथम प्रयास

गड़ गड़ करता बादल गर्जा, कड़की बिजली टूटी गाज
सन सन करती चली हवाएं, कुदरत हो बैठी नाराज
पलक झपकते प्रलय हो गई, उजड़े लाखों घर परिवार
पल में साँसे रुकी हजारों, सह ना पाया कोई वार

डगमग डगमग डोली धरती, अम्बर से आई बरसात
घना अँधेरा छाया क्षण में, दिन आभासित होता रात
आनन फानन में उठ नदियाँ, भरकर दौड़ीं जल भण्डार

इस भारी विपदा के केवल, हम सब मानव जिम्मेदार

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by अरुन 'अनन्त' on June 27, 2013 at 4:59pm

आदरणीय गुरुदेव श्री अभी अभी अइसन आभास हुआ कि आपने याद किया है अउर हम ऑनलाइन आये तो आपकी टिपण्णी मिल गई, ई सचमुच मा आपने याद किया हुआ है. गुरुदेव श्री आपने बताया तो था "ई प्रलयवा आता है" . यदि आप कन्फुजियाई जांयेंगे तो हमरा का होगा.

एक तो इस बार ये "मिसरा" साहब परेशान किये हैं कछू समझ नहीं आवत बा गुरुदेव श्री.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 27, 2013 at 4:48pm

ए अरुन अनन्त भाई,   ई प्रलयवा आता है कि आती है, जी ????????

हम सचकी पूरा कन्फ़ुजिया गये हैं.. सच्ची-मुच्ची..  

भइया, बिहार राज्य का हवा भी अइसने होता है. तिसपर पटना तो राजधानी है.. :-))

अच्छा हुआ तीने दिन में हम निकल लिये गनेस भाई का लिट्टी-चोखा खा के.. .. :-))))))))))))

जय हो

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 27, 2013 at 12:06pm

अनेक अनेक धन्यवाद आदरणीय गुरुदेव श्री आपका आशीष यूँ ही मिलता रहा तो वीर छंद की अन्यान्य विशेषतताओं को भी हृदयंगम करने का प्रयास अवश्य करूँगा और आपके मुख से वाह वाही भी बटोर लूँगा. पुनः हार्दिक आभार आपका.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 26, 2013 at 6:15pm

वीर छंद पर हुए इस प्रथम प्रयास केलिए बधाई.

वीर छंद की अन्यान्य विशेषतताओं को भी हृदयंगम करने का प्रयास करें

शुभम्

प्रलय होती नहीं भाई,  प्रलय होता है. यदि मैं गलत होऊँ तो बताइयेगा.

सधन्यवाद

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 26, 2013 at 3:16pm

हादिक आभार अनुज

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 26, 2013 at 3:16pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीया सरिता जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 26, 2013 at 3:16pm

हार्दिक आभार आदरणीया महिमा श्री जी

Comment by ram shiromani pathak on June 26, 2013 at 12:23pm

वाह भाई साहब क्या खूब सजीव चित्रण किया है अपने //इस मार्मिक वीर छंद के लिए हार्दिक बधाई आपको //सादर 

Comment by Sarita Bhatia on June 26, 2013 at 10:44am

प्रथम प्रयास सराहनीय है अरुण 

बहुत बहुत बधाई 

Comment by MAHIMA SHREE on June 25, 2013 at 11:37pm

बहुत ही सुंदर प्रस्तुती आदरणीय अनंत जी .भाव बड़े ही स्पष्ट हैं .. बहुत-२ बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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