For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कौन मजबूत? कौन कमजोर ?

इम्तिहान

एक दौर

चलता है जीवन भर !

सफलता

पाता है कोई

कभी थम जाये सफ़र !

कमजोर

का साथ

देना सीखा,

ज़रुरत

मदद की

उसे ही रहती .

सदा साथ

नर का

देती रही ,

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती ,

मगर नारी

चले मंजिल की ओर

पीछे उसके दूर दूर तक

वीराना रहे ,

और अकेली

वह इम्तिहान में

सफलता पाती !

फिर कौन मजबूत?

कौन कमजोर ?

दुनिया क्यों समझ न पाती ?

(मौलिक व् अप्रकाशित)

शालिनी कौशिक


Views: 725

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 10:32pm
vandna ji aur yogi ji amulaya vicharon ke liye hardik dhanyawad.
Comment by Vindu Babu on April 16, 2013 at 4:01pm
आदरणीया शालिनी जी आपकी भावाभयक्ति का मैं आदर करती हूं। आज नारी सशक्तिकरण के दौर में भी नारी के सफलता मार्ग में पुरुषों की अपेक्षा अधिक वीराना होता है।दुसरी बात ज्यादा संघर्ष इसलिए भी होता है कि उसके साथ घर-बाहर दोनों के दायित्व जुड़े होतें हैं।
पर क्षमा करें आदरणीया क्योंकि यहां पर तुलना की बात बहुत ज्याद प्रासंगिक नहीं लगती,नार नारी दोनो ही एक दुसरे के पूरक हैं कहीं न कहीं एक नारी के जीवन मे पुरुष के रूप में पिता/भाई/शिक्षक/पति/आदि के रूप थोड़ा बहुत सहयोग तो रहता ही है। फिर महोदया नारी की शक्ति को आज तक कौन नकार पाया है,भले घर के अन्दर कोई नीचा दिखाने का दु:स्साहस कर ले।
सुन्दर भावपुर्ण रचना के लिए सादर बधाई स्वीकारें।
सादर
वन्दना
Comment by Yogi Saraswat on April 16, 2013 at 10:55am

साया बन

संग उसके

खड़ी है रही ,

परीक्षा की घडी

आये पुरुष की

नारी बन सहायक

सफलता दिलाती ,

मगर नारी

चले मंजिल की ओर

पीछे उसके दूर दूर तक

वीराना रहे ,

और अकेली

सुन्दर शब्द शालिनी जी

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:24am

keval prasad ji hardik dhanyawad

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:22am

pradeep ji ,lakshman ji ,ram ji aap sabhi ka hardik dhanyawad

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:21am

@brijesh ji .abhi seekh rahi hoon aapke sujhav dhayan me rakhoongi .aabhar margdarshan ke liye .

Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:19am
@prachi ji .sarahna hetu aabhar .
Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:17am
@ashok ji मगर नारी को ताकतवर दिखाने के चक्कर में नर से क्यों बैर ले बैठी हैं? भाई संदीप जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ और मुझे लगता है मिथ्या बातें रचना की अच्छी बातों का भी वजन कम कर देती हैं-aap swayam man rahe hain ki nari se nar kee chidh nari kee safalta ka sach kahne me nar se kahe ka vair aur fir aajkal to sach bolne se vair hota hai mithya se nahi isliye meri baten mithya hai ya satya swayam anuman laga lijiye .aapke vichar mere liye amulaya hai aage se dhyan me rakhoongi .aabhar
Comment by shalini kaushik on April 16, 2013 at 1:11am
@sandeep ji हर समय उसके जीवन साथी ने उसका साथ निभाया होगा aap to swayam sanshay me hain aur sach kahoon ye satya hai .nar ne nari ka sath nari kee tarah nahi nibhya.aapke amulaya vicharon ke liye aabhar
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 15, 2013 at 10:38pm

आदरणीया शालिनी जी सादर, नारी को संबल देती रचना पर  बधाई. मगर नारी को ताकतवर दिखाने के चक्कर में नर से क्यों बैर ले बैठी हैं? भाई संदीप जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ और मुझे लगता है मिथ्या बातें रचना की अच्छी बातों का भी वजन कम कर देती हैं.मुझे लगता है इसपर ध्यान देने की आवश्यकता है.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service