For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हर तरफ खौफनाक सन्नाटा

कहीं कोई आवाज नहीं

हालांकि दर्द हदों को छू गया।

 

जिंदगी

दरकने लगी है

तप रही है जमीन,

पानी की बूंद

गायब हो जाती है

गिरते ही;

सिर झुकाए लेटी

भूरी घास की आंख में

प्यास छलकती है।

 

ओठों पर जमी

पपड़ियां रोकती हैं

शब्दों को बढ़ने से

हवा घूम फिर कर

लौट आती है वहीं

जर्जर किवाड़

हिलता है बस।

 

छप्पर के नीचे

सिर झुकाए बैठा

कुत्ता

रखवाली कर रहा है

जरूरतों की।

 

भूख

अहसास बन

पूरे मन पर छा गयी;

चूल्हों ने बंद कर दिया

शिकायत करना।

 

शरीर में जगह जगह

उभर आई हैं दरारें

जिन्हें चीथड़ों से भरने की कोशिश

नाकाम होने लगी हैं।

 

आंख में कोई सपना तो नहीं

लेकिन देखती हैं उस तरफ

जो सड़क संसद को जाती है

वह सड़क बंद है।

               - बृजेश नीरज

 

Views: 776

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 14, 2013 at 5:00pm

आंख में कोई सपना तो नहीं

लेकिन देखती हैं उस तरफ

जो सड़क संसद को जाती है

वह सड़क बंद है।

 आदरणीय ब्रजेश जी 

सादर 

बधाई.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 14, 2013 at 4:03pm

आंख में कोई सपना तो नहीं

लेकिन देखती हैं उस तरफ

जो सड़क संसद को जाती है

वह सड़क बंद है।...................................एक अंधा बहरा रास्ता बंद ही तो कहलाता है 

गरीब की बेबसी दर्द की इन्तेहाँ की मार्मिक अभिव्यक्ति... और अंत अद्भुद 

बहुत बहुत बधाई इस सशक्त अभिव्यक्ति के लिए आ० बृजेश जी 

Comment by बृजेश नीरज on April 14, 2013 at 3:20pm

आदरणीय रक्ताले साहब आपका आभार! आपने जो पंक्तियां लिखी हैं उन्होंने वातावरण में जान डाल दी। सादर!

Comment by बृजेश नीरज on April 14, 2013 at 2:50pm

राम भाई जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 14, 2013 at 2:26pm

आंख में कोई सपना तो नहीं

लेकिन देखती हैं उस तरफ

जो सड़क संसद को जाती है

वह सड़क बंद है।.......................बहुत बढ़िया. तुम्हारा घर तुमको मुबारक, हमारी नीव क्यों हिला रहे हो.

सुन्दर रचना आदरणीय बृजेश नीरज जी. बधाई स्वीकारें.

Comment by ram shiromani pathak on April 14, 2013 at 1:34pm

ओठों पर जमी

पपड़ियां रोकती हैं

शब्दों को बढ़ने से/// मार्मिक

आदरणीय बृजेश जी,बहुत सुन्दर,बधाई स्वीकार कीजिये सादर 

Comment by बृजेश नीरज on April 14, 2013 at 10:23am

वंदना जी इस जनतंत्र में हमारी सारी जरूरत, सारी उम्मीद टिकी होती है संसद पर। आमजन का भविष्य संसद के हाथों में है लेकिन दुखद यह है कि संसद को इस आम आदमी की कोई फिक्र नहीं है। आशा है आप मेरा आशय समझ गयी होंगी।
आपका बहुत धन्यवाद!
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on April 14, 2013 at 10:18am

आदरेया कुंती जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद! आपके उत्साहवर्धन ने नया जोश पैदा किया। मेरी लेखनी का नहीं यह आप लोगों का प्रेम और ओ बी ओ के मार्गदर्शन का परिणाम है जो कुछ ऐसा लिख पाया जिसे लोगों ने पसन्द किया।
नतमस्तक तो मैं हूं आपके समक्ष जो फ्रेंच भाषी होने के बावजूद आप हिन्दी से इतना प्रेम करती हैं।
सादर!

Comment by बृजेश नीरज on April 14, 2013 at 10:13am

आदरणीय विजय जी आपका आभार! आपकी टिप्पणी मेरे लिए सदैव ऊर्जा का स्रोत होती है।

Comment by Vindu Babu on April 14, 2013 at 10:11am
पूरी कविता बहुत ही प्रभावपूर्ण लगी पर अन्त में 'संसद' को जाती है... मतलब?कृपया बताएं आदरणीय महोदय।
बहुत सुन्दर भावाभ्यक्ति,सादर बधाई स्वीकारें।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Monday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Sunday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service