For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


शाम हो रही थी साहब घर जाने के लिए निकले और जाते जाते रामदीन को मेरी जिम्मेदारी सौंप गये. रामदीन को भी घर जाना था इसलिए उसने जल्दी से मुझे नीचे उतरा और झाड़ा झटका, अचानक मुझ पर पडी गर्द रामदीन से जा चिपकी, वह झुझला गया जैसे उसके शरीर पर धूल न चिपक गई हो बल्कि उसकी आत्मा से ईमानदारी जा चिपकी हो. उसने तुरंत अपने गमछे से सारे शरीर को झाड़ा और एक बार आईने में भी देख आया, उसे लग रहा था जैसे इमानदारी अब भी उससे चिपकी रह गई है. उसने मुझे तह किया और अलमारी में रख दिया. 
***
रामदीन ने बहुत दिन के बाद मुझे अलमारी से निकला, मैंने देखा कैलेण्डर के कई पन्ने पलते जा चुके हैं. अगस्त ! तो क्या पन्द्रह अगस्त आ गया ? उसने मुझे फिर से झाडा झटका, गर्द तो एक बार फिर से उस पर चिपका चाहती थी मगर गरीब रामदीन इस बार सावधान था, उसे पता था कि वो यह बोझ नहीं उठा सकता.

साहब आ चुके हैं, दस बजे ध्वजारोहण होगा. 

Views: 684

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on December 14, 2012 at 6:08pm

वीनस जी,

थोड़ी सी टाइपिंग की अशुद्धी है, उसे सही कर दें | 

१. "रामदीन ने बहुत दिन के बाद मुझे अलमारी से निकला", यहाँ निकला की जगह निकाला कर दें

२. "मैंने देखा कैलेण्डर के कई पन्ने पलते जा चुके हैं" यहाँ पलते की जगह पलटे होना चाहिए|

३. "गर्द तो एक बार फिर से उस पर चिपका चाहती" यहाँ चिपका की जगह चिपकना है शायद |

इस तरह की अशुद्धी मुझसे भी कई बार होती है, लेकिन भला हो ओबीओ का कि यहाँ निराकरण का ऑप्शन मौजूद है|

Comment by Dipak Mashal on December 13, 2012 at 10:53pm

''झूठा है इस लघुकथा का लेखक, जो यह कहता है की यह उसकी पहली लघुकथा है।''(एक मजाक) :) कथ्य और शिल्प दोनों ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वह उतावले बैठे थे कि कब वीनस अपनी पहली लघुकथा लिखे और हम तपे सोने की तरह ओ बी ओ पर जड़ जाएँ।

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:07pm

चन्द्रेश जी शुक्रिया

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:07pm

SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR

धन्यवाद आदरणीय

Comment by वीनस केसरी on November 26, 2012 at 2:06pm

डॉ. बाली साहिब सही कहा आपने आजकल इस गर्द को लोग बहुत हिकारत की नज़र से देखते हैं 

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on November 25, 2012 at 11:28pm

बहुत उम्दा (लघु) कथा है | सच्चाई और ईमानदारी वास्तव में गर्द खा रही है|

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on November 22, 2012 at 11:49pm
वीनस भाई एक अलग तरह की शैली की कथा ..व्यंग्य का पुट  लिए हुए ...सच में हाल यही है ईमानदारी सम्हालना साँसों के सम्हालने से बढ़ के है 
माह के सक्रीय सदस्य चुने जाने पर आप को और आप के श्रम को सलाम 
सस्नेह 
भ्रमर 5 
Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on November 20, 2012 at 10:46am

वीनस भाई आजकल ईमानदारी को लोग ऐसे झाड पोंछ कर आलमारी में रखते हैं...साथ लेकर चलाने में दर है कहीं कोई चुरा न ले......हाहाहाहाह ...बहुत बढ़िया बिम्ब लेख ! बधाई स्वीकार करें !

Comment by वीनस केसरी on November 16, 2012 at 1:05am

सौरभ जी हार्दिक धन्यवाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 14, 2012 at 2:53pm

//मगर गरीब रामदीन इस बार सावधान था, उसे पता था कि वो यह बोझ नहीं उठा सकता.//
एक अलग ज़मीन और लहज़े की लघुकथा. झण्डे की आँखों से बेहतर दिखा कि कर्मकाण्ड कितना हावी होता जा रहा है !

बधाई, भाई वीनसजी.. .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service