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आ प्रिये कि प्रेम का हो एक नया शृंगार अब....

आ प्रिये कि हो नयी
कुछ कल्पना - कुछ सर्जना,
आ प्रिये कि प्रेम का हो
एक नया शृंगार अब.....

तू रहे ना तू कि मैं ना
मैं रहूँ अब यूं अलग
हो विलय अब तन से तन का
मन से मन का - प्राणों का,
आ कि एक - एक स्वप्न मन का
हो सभी साकार अब....

अधर से अधरों का मिलना
साँसों से हो सांस का,
हो सभी दुखों का मिटना
और सभी अवसाद का,
आ करें हम ऊर्जा का
एक नया संचार अब.....

चल मिलें मिलकर छुएं
हम प्रेम का चरमोत्कर्ष,
चल करें अनुभव सभी
आनंद एवं सारे हर्ष,
आ चलें हम साथ मिलकर
प्रेम के उस पार अब....

ध्यान की ऐसी समाधि
आ लगायें साथ मिल,
प्रेम की इस साधना से
ईश्वर भी जाए हिल,
आ करें ऐसा अलौकिक
प्रेम का विस्तार अब....

- VISHAAL CHARCHCHIT

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Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 22, 2012 at 8:52pm

लोकेश भाई इन प्रेरक शब्दों के लिये हृदय से आभार !!!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 22, 2012 at 8:51pm

राज तोमर भाई दिल से शुक्रिया आपका !!!!

Comment by लोकेश सिंह on September 18, 2012 at 12:25pm

अनुभूति के चरमोत्कर्ष का  सजीव चित्रण , प्रेम से समाधि तक ,सटीक सब्द भावपूर्ण अभ्व्यक्ति  ,बहुत खूब ....

Comment by Raj Tomar on September 15, 2012 at 7:39pm

बहुत खूब विशाल जी.:)
" तू रहे ना तू कि मैं ना 
मैं रहूँ अब यूं अलग
हो विलय अब तन से तन का 
मन से मन का - प्राणों का,"... वाह वाह..:)

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 6, 2012 at 10:49am

आपका ह्रदय से आभार Ambarish Srivastava जी एवं संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' जी !!!!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on September 4, 2012 at 11:10am

गहन भावों से परिपूर्ण रचना! महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना चुने जाने हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें चर्चित जी!

Comment by Er. Ambarish Srivastava on September 3, 2012 at 9:27pm

इस भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ! सस्नेह

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 3, 2012 at 12:22am

आपका बहुत - बहुत धन्यवाद Laxman Prasad जी !!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 3, 2012 at 12:21am

एक बार फिर से आभार Saurabh Pandey सर जी......एवं नमन आपके हिंदी ज्ञान को एवं नमन आपकी पारखी दृष्टि को......!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on September 3, 2012 at 12:18am

धन्यवाद Shubhranshu JI !!!

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