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"लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर"

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

मत बजाएम रऊरा थरीया चाहे

ना तऽ के बजाई,थरीया पितल के

रऊरा भाई-भतीजन के जन्म पर

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

मत गाएम रऊरा मंगल गीत चाहे

ना तऽ के गाई गीत

रऊरा लइकन के विआह में

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

मत देहब कौनो विश्वास उनका के

ना तऽ कइसे कराएम,रऊरा

दर्ज अदालत में ,मामला घरेलू हिंसा के

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

मत देहब कौनो आशीर्वाद उनका के

ना तऽ कइसे देहब रऊरा

गारी माई-बहिन के नाम के

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

मत देहब कौनो प्यार उनका के

ना तऽ कइसे जराएम रऊरा

बेटियन के दहेज के नाम पर

लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

पनपे दिही भ्रूण उनकर

ना तऽ के धारण करी रऊरा

बेटवन के भ्रूण अपना कोख में

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Comment

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Comment by BIJAY PATHAK on April 17, 2010 at 7:18pm
Bah Babua , kamal ke lilkhle bara
Bahut acha lagal tahar bastawikta ke chitran
Bijay Pathak

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 16, 2010 at 9:44pm
लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

पनपे दिही भ्रूण उनकर

ना तऽ के धारण करी रऊरा

बेटवन के भ्रूण अपना कोख में

राजू भाई रउवा अपना कविता के माध्यम से एगो बहुत ही बड़ सामाजिक मुद्दा के उठवले बानी, भ्रूण ह्त्या , ह्त्या से भी गंभीर अपराध बा, अगर कोई, कोई के हत्या कर देला त उ बर्तमान के साथ घात करेला, लेकिन भ्रूण हत्या त भविष्य के साथ घात बा, एकरा पर त बहुत कड़ाई से रोक लागे के चाहि, ना त उ दिन दूर नईखे जब बेटा लोग खातिर बहू मिलल बंद हो जाई, और एगो सामाजिक संरचना समाप्त होखे के कगार पर पहुच जाई, बहुत बढ़िया कविता लिखले बानी राजू भाई एह कविता के कवनो जबाब नइखे, हम त बस एतने कहब की अतुलनीय रचना बा राउर,

कईसे सोचल करे के इ अपराध,
माई के काहे ना आइल याद,
उहोओ त कोई के बेटी ही बाड़ी,
बिन उनका तू लोग कहा से अईता ,
संभल जा अबो ना त,
हो जाई इ दुनिया बर्बाद,

हम इहे बिषय पर कुछ दिन पहिले एगो ब्लॉग पोस्ट कैले रहनी रउवा सभे देख सकत बानी,
http://openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:930
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 16, 2010 at 7:38pm
bahut badhiya raju bhai hamesha ke tarah ek aur dhamakedaar prastuti.......
लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर
मत बजाएम रऊरा थरीया चाहे
ना तऽ के बजाई,थरीया पितल के
रऊरा भाई-भतीजन के जन्म पर
लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर
bahut badhiya ehi tarah lagal raha.........
Comment by Admin on April 16, 2010 at 4:32pm
लेवे दी जन्म बेटियन के धरती पर

पनपे दिही भ्रूण उनकर

ना तऽ के धारण करी रऊरा

बेटवन के भ्रूण अपना कोख में

बहुत खूब राजू जी , अनमोल , अनमोल, अनमोल, हां अनमोल बा राउर इ रचना और आँख मे अंशु ला देहलस ई राउर कविता, बहुत ही बढ़िया लिखले बानी राजू जी, हमरा लगे शब्द के आकाल हो गइल बा ई रचना के आगे, महान बा ई रचना अपने आप मे, आँख खुल जाये के चाहि उ माई बाप के जी धरती पर आवे से पहिले गला घोट देत बा लक्ष्मी के,
बहुत बहुत धन्यबाद बा ई रचना खातिर,

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