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तेरी ही यादों मे जीता हुँ
तेरी ही यादों मे मरता हुँ
गुजरे पलों को याद कर
बस तेरे ही ख्यालों मे रहता हुँ
महफिल भी रास नही आती
तन्हाई मे भी तन्हा ही रहता हुँ
सफर अभी कितना लम्बा है
ये सोच के मै घबराता हुँ
मुद्दतें बीत गई तुम्हे देखे हुए
सब्र ना टुट जाऐ ये सोच के डर जाता हुँ
दुर कही जमीं-आसमाँ मिले
ये देख मै भी उम्मीद जगाता हूँ

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Comment by Admin on April 23, 2010 at 9:04am
राजू जी, हमलोगो ने आपके लेखन का कमाल भोजपुरी रचनाऒ मे तो देखा ही है, पर आप तो हिन्दी कविता भी काफी अच्छी लिख रहे है । बहुत सुन्दर रचना है, ऐसे हि लिखते रहिये, सही जा रहे है ।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 23, 2010 at 8:43am
दुर कही जमीं-आसमाँ मिले
ये देख मै भी उम्मीद जगाता हूँ
Raju jee, bahu badhiya kavita hai, ees kavita ki khas baat ,antim line mey aapney sakaratmak view diyaa hai,achhi kavita hai,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 22, 2010 at 11:32pm
bahut badhiya raju bhai.....
तेरी ही यादों मे जीता हुँ
तेरी ही यादों मे मरता हुँ
गुजरे पलों को याद कर
बस तेरे ही ख्यालों मे रहता हुँ
bahut shaandaar...aisehi likhate rahiy

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