For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे पिता मेरा गर्व  - लघुकथा -

मेरे पिता मेरा गर्व  - लघुकथा - 

सुरेखा जी समाज शास्त्र की अध्यापिका होने के कारण   सातवीं कक्षा के बच्चों को "सामाजिक स्तर" क्या होता है। इस विषय पर पढ़ा रहीं थीं। कुछ छात्र सही तौर पर समझ नहीं पा रहे थे। अतः सुरेखा जी ने सभी छात्रों को  शीतकालीन अवकाश में अपने अपने पिता के विषय में एक निबंध लिख कर लाने का गृह कार्य दिया। 

साथ ही यह हिदायत भी दी कि यह निबंध काल्पनिक नहीं होना चाहिये। इसका आधार सत्यता और वास्तविकता को दर्शाता हुआ होना चाहिये। 

आज सुरेखा जी सभी बच्चों द्वारा लिख कर दिये निबंध पढ़ रहीं थीं। अधिकांश बच्चे संपन्न और शिक्षित परिवारों से थे। उनके निबंधों से भी यह प्रतीत हो रहा था। साथ ही यह भी स्पष्ट हो रहा था कि उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य से मदद लेकर यह निबंध लिखा है। क्योंकि सुरेखा जी सभी छात्रों के बौद्धिक स्तर और क्षमता से पूर्ण रूप से वाक़िफ़ थीं। 

सभी बच्चों की कापियों को जाँचने के बाद सुरेखा जी ने कपिल को अपने पास बुलाया।

सुरेखा जी ने पूरी कक्षा को संबोधित करते हुए बताया कि कपिल ने सबसे अच्छा व प्रेरक  निबंध लिखा है। मेरी इच्छा है कि कपिल अपने पिता के बारे में सब को बतायें।

"मेरे पिता एक मामूली डाकिया हैं। वे बहुत गरीब परिवार से हैं। इसलिये मेरे सहपाठी मेरा मजाक उड़ाते हैं।वे बहुत पढ़े लिखे हैं लेकिन उन्होंने एक डाकिया बनना पसंद किया। वे सेना में जाना चाहते थे। लेकिन मेरी दादी की इच्छा नहीं थी। 

उनके एक मित्र सेना में थे। उनकी माँ गाँव में अकेली रहती थीं।मेरे पिता उनकी भी अपनी माँ की तरह ही देख भाल करते थे।उनके बेटे के मनीआर्डर भी पिताजी ही लाकर देते थे। पिछले साल उन दादी अम्मा की मृत्यु होने पर जब उनके बेटे को बुलाया गया तो यह भेद खुला कि उनके बेटे की मृत्यु तो एक युद्ध में पांच साल पहले ही हो चुकी थी। मेरे पिताजी अपनी अल्प आय में से अपने मित्र की बूढ़ी माँ को सदमे से बचाने के कारण कुछ रुपये मनीआर्डर के रूप में देते रहते थे। 

इसी सराहनीय कार्य हेतु उनको  विभागीय अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा सम्मानित किया गया।" 

अधिकांश बच्चों के सिर झुके हुए थे लेकिन कपिल का सिर गर्व से उठा हुआ था।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 571

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on January 14, 2022 at 11:51am

हार्दिक आभार आदरणीय अमीरुददीन "अमीर" साहब जी।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on January 13, 2022 at 5:02pm

बहुत ख़ूब ! जनाब तेजवीर सिंह जी, लघुकथा की बधाई स्वीकार करें। 

Comment by TEJ VEER SINGH on January 12, 2022 at 11:55am

हार्दिक आभार आदरणीय मनोज अहसास जी।

Comment by मनोज अहसास on January 12, 2022 at 12:36am

बहुत सुंदर लघुकथा की हार्दिक बधाई आदरणीय

Comment by TEJ VEER SINGH on January 11, 2022 at 5:34pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी  जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 11, 2022 at 11:39am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। सुंदर प्रेरणादायी लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
1 minute ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
18 minutes ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
21 minutes ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
28 minutes ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
35 minutes ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
39 minutes ago
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई…"
59 minutes ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना…"
1 hour ago
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जो भी बोलना चाहा आपने अच्छा बोला। बाकी कमी बेसी आदरणीय उस्ताद जन बोलना चाहेंगे।"
1 hour ago
Awanish Dhar Dvivedi commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"सर नमस्कार मुझे ग़जल का ज्ञान नहीं है  अरकान आदि को नहींं जानता हूँ। बस भव में कुछ लिख देता हूँ।"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ जैसे मंच की ये स्थिति अत्यंत कष्टप्रद है। अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक विवशताओं , व्यस्ततओं…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service